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आपकी बात, दलबदल कानून को कैसे प्रभावशाली बनाया जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Jan 31, 2023

आपकी बात, दलबदल कानून को कैसे प्रभावशाली बनाया जा सकता है?

आपकी बात, दलबदल कानून को कैसे प्रभावशाली बनाया जा सकता है?

दलबदल कानून की प्रासंगिकता पर सवाल
वर्तमान में राजनीतिक दलों में दलबदल की प्रवृत्ति का मुख्य कारण दल के अंदर लोकतांत्रिक चरित्र का अभाव है। विधायकों की खरीद-फरोख्त ने एक बार फिर से दलबदल कानून की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
-कनिष्क माथुर, जयपुर
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पांच वर्ष चुनाव लडऩे पर लगे रोक
लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त लोकतन्त्र को कमजोर करती है। इस पर रोक लगनी चाहिए। दलबदल कानून को ओर मजबूत करना चाहिए। जो नेता दलबदल करे, उसे पांच साल चुनाव लडऩे पर रोक लगे।
-रोहित सोलंकी पिपरिया, नर्मदापुरम ,मप्र
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छवि पर असर
दलबदल भारतीय राजनीति की छवि धूमिल करता है। ऐसा कानून जरूरी है जिससे दलबदल की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।
-मदनलाल लंबोरिया, भिरानी
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कानून में बदलाव जरूरी
दलबदल कानून के बावजूद नेताओं में दलबदल की प्रवृत्ति बढ़ी है। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए केन्द्र सरकार को दलबदल कानून में बदलाव करना चाहिए। चुनाव जीतकर दलबदलने वाले नेताओं के फिर से चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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सख्त प्रावधान जरूरी
दलबदल राजनीतिक दलों एवं देश के लिए फांस की तरह नुकसानदायक है। दलबदल कानून को प्रभावशाली बनाने के लिए संबंधित को चुनाव लडने के अयोग्य करने व चुनाव खर्च मय ब्याज वसूल कर सजा का प्रावधान होना चाहिए। ऐसे सख्त प्रावधान से ही मतदाता के अमूल्य मत के साथ न्याय हो सकेगा।
बृजनेहरू पाटीदार, नीमच
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खुद का स्वार्थ देखते हैं नेता
- आजकल नेता देश की नहीं सोचते, बल्कि खुद का स्वार्थ पहले देखते हैं, जहां ज्यादा इज्जत वहां वैसा काम करते हैं!
-प्रियव्रत चारण, जोधपुर
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दलबदल प्रवृत्ति पर चोट जरूरी
कुछ जनप्रतिनिधि व्यक्तिगत लाभ के कारण अपने राजनीतिक दल को चोट पहुंचाते हैं और जनता को भी धोखा देते हैं। इस प्रवृत्ति पर चोट जरूरी है।
-मनु प्रताप सिंह, चींचडौली, खेतड़ी
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खत्म करनी होगी सदस्यता
दल बदलने पर सदन की सदस्यता से वंचित करने का प्रावधान होना चाहिए। निर्दलीय प्रत्याशी के लिए सदन में शपथ के साथ ही यह घोषणा जरूरी होनी चाहिए कि वह सत्ता के साथ रहेगा या विपक्ष के साथ।
-बाल कृष्ण जाजू, जयपुर
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ताकि जीतने पर छोड़े नहीं कोई अपना दल
जो नेता जिस दल से जितने वक्त के लिए चुनाव जीतता है, वह पूरा वक्त उसी दल में रहे। अगर कोई व्यक्ति चुनाव जीतने के बाद दल छोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के कानूनी प्रावधान किए जाएं।
-मोहन बोहरा, उदयपुर