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आपकी बात…देश में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढाई जा सकती है

पाठकों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं आईं...पेश हैं चुनींदा प्रतिक्रियाएं    

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जयपुर

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VIKAS MATHUR

Jan 22, 2024

आपकी बात...देश में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढाई जा सकती है

आपकी बात...देश में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढाई जा सकती है

रटन्त पद्धति के बजाय समझ पर जोर
के.कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई गई है। यह भारतीय मूल्यों से ओत—प्रोत है। इसमें छात्रों को मौलिक दायित्व, संवैधानिक मूल्यों के साथ जुड़ाव न केवल विचारों में, बल्कि व्यवहार, बुद्धि और उनके कार्यों में भी हो। ऐसा प्रावधान किया गया है। बच्चों को रटन्त पद्धति के बजाय समझ पर जोर दिया गया है। बच्चों व अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा में गुणवत्ता आएगी।
दिनेश परिहार , मुंदड़ीवाला , रतलाम

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शिक्षक ज्ञानवान व चरित्रवान हों
स्कूल के भवन, भौतिक संसाधनों के स्थान पर शिक्षक भर्ती पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षक सुयोग्य, ज्ञानी और चरित्रवान होने चाहिए। शिक्षा नीति बनाते समय अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीयता के साथ स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि ज्ञान का उपयोग हो सके।
अजीत जैन, प्रधानाचार्य, डूंगरपुर

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शिक्षक, बच्चों के लिए प्रेरणादायी बनें
इसके लिए शिक्षक गुणवान हो, तभी वह अच्छी शिक्षा दे सकता है। उसे सभी बच्चों की कमजोरी व क्षमताओं के बारे में पता होना चाहिए। कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान दें। शिक्षक, बच्चों को हमेशा प्रेरणा देते रहें। साथ ही खेलों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
कृष्ण कुमार मीना, राजगढ़ (अलवर)

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शिक्षक, गैर—शैक्षणिक कार्यों में न लगें
शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। शिक्षकों को गैरशैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाना चाहिए। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। परीक्षा के समय भी वे व्यस्त रहते हैं। उन्हें बच्चों को अधिक गंभीरता से पढाना चाहिए।
साजिद अली,चंदन नगर, इंदौर।

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सरकारी स्कूल के शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढें
देश मे शिक्षकों की संख्या में काफी बढोतरी हुई है। सरकारी शिक्षक, शिक्षा को व्यवसाय के रूप में देखते हैं। वे अध्यापन कार्य के प्रति गंभीर नहीं रहते। सरकारी शिक्षकों के लिए बाध्यता होनी चाहिए कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवाएं। तभी वे बच्चों पर अधिक ध्यान देंगे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।
धीरज कुमार कश्यप, शंकरगढ़ बलरामपुर ,छत्तीसगढ़

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नवाचारों से बदलेगा परिदृश्य
'सा विद्या या विमुक्तये' अर्थात शिक्षा वह है, जो हमें बंधनों से मुक्त करती है। हमारी सोच का विस्तार करती है। सर्वांगीण विकास में मदद करती है। शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। वहां अध्यापन हेतु योग्य शिक्षक उपलब्ध हो। बच्चों को अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी शिक्षा दी जाए। ई-एजुकेशन की आवश्यकता को देखते हुए सभी राजकीय विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं का संचालन हो। छात्रों में आत्मविश्वास का संचार हो। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए। व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा दी जानी चाहिए।
डॉ. राजेन्द्र कुमावत, जयपुर

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अध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका
शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अध्यापकों की महत्ती भूमिका है। अध्यापक शिक्षा के व्यापक प्रसार व संसाधनों का व्यापक प्रयोग किया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 भी गुणवत्ता परक शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेगी। सभी राज्य इस शिक्षा नीति को विस्तार पूर्वक लागू करें।
विक्रम सिंह नागड़ी,खींवसर

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ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चिंताजनक
शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चिंताजनक है। गांवों में शिक्षकों की उपस्थिति नियमित हो। शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए। स्कलों की पढाई की नियमित मॉनीटरिंग हो। केंद्र सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षा के बजट को बढाना चाहिए।
सतीश उपाध्याय,मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

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