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आपकी बातः साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं से कैसे निपटा जाए?

अनेक पाठकों ने प्रतिक्रया व्यक्त की है। प्रस्तुत हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं -

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Nitin Kumar

Aug 02, 2023

आपकी बातः साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं से कैसे निपटा जाए?

आपकी बातः साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं से कैसे निपटा जाए?

नेता बांट रहे हैं समाज को

हमारे देश में धर्म और जाति की जड़ें काफी गहरी हैं। नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम कर रहे हैं। धार्मिक व जातीय आधार पर राजनीति के चलते धार्मिक सौहार्द बिगड़ा है। जाति और धर्म के नाम पर वैमनस्यता फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

- प्रकाश भगत, चांदपुरा, नागौर

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अपराधियों को मिले कठोरतम दंड

हिंसक भीड़ भारत की मानवीय, स्थायी, सरकारी तथा निजी संपत्तियों के साथ-साथ "विविधता में एकता" की छवि को भी भारी नुकसान कारित करती है, जिसकी भरपाई इन्हीं से लेने का प्रावधान हो तथा हिंसा नियंत्रित करने हेतु पुलिस आंसू गैस, पानी की बौछार के साथ हिंसा के विरुद्ध हिंसक बल का प्रयोग कर सकती है। नियंत्रण के पश्चात ड्रोन फुटेज से अपराधियों की पहचान कर न्यायालय में कठोर दंड देकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि अपराधियों में कानून का डर हो। समाज में भाईचारा, जागरूकता, आपसी प्रेम-सौहार्द को प्रोत्साहन देना, रैलियों के समय संवेदनशील क्षेत्रो में ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती आदि को पूर्ववर्ती उपायों के रूप में देखा जा सकता है।

- भरत श्रीमाली, बीकानेर।

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संलिप्त लोगों की सुविधाएं रोकी जाएं

सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं के पीछे राजनीति के तवे पर वोट की रोटियां सेकने की तुष्ट सोच जिम्मेदार है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए घटना क्षेत्र, संलिप्त व्यक्तियों एवं पोषण करने वाले नेताओं को राशन, गैस बुकिंग, कृषि सम्मान निधि, वृद्ध पेंशन जैसे प्रत्यक्ष सुविधा लाभ रोकने के साथ निश्चित समय के लिए चुनाव लड़ने की पात्रता को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। ऐसे समाधान से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता हैl

- बाल कृष्ण जाजू, जयपुर

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इंटेलिजेंस विंग के इनपुट हो सकते हैं महत्वपूर्ण

हम आए दिन छुटपुट वारदातों को बहुत वृहद् स्तरीय सांप्रदायिक दंगों में बदलते हुए देख रहे हैं। यह बहुत ही चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण घटनाएं हैं। इनसे निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन को बहुत चौकस और चौकन्ना होने की आवश्यकता है। कानूनी कार्यवाही में राजनीतिक हस्तक्षेप एवं पक्षपातपूर्ण रवैया बिल्कुल असहनीय है। पुलिस की इंटेलिजेंस विंग दंगे भड़कने से पहले ही पुख्ता इनपुट्स देकर ऐसी घटनाओं को घटित होने से रोक सकती है। दंगाइयों की पहचान की जाकर उनके विरुद्ध शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक पुलिस कार्यवाही की जानी चाहिए - ताकि उनको सख्त सजा दिलाई जा सके। इनके आकाओं को भी नहीं बख्शा जाना चाहिए।

- ईश्वर जैन 'कौस्तुभ', उदयपुर
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खुफिया तंत्र को दुरुस्त किया जाए

किसी भी मकसद से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर पुलिस और प्रशासन की पैनी नजर होनी चाहिए। अगर किसी भी मौके पर कहीं भी सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता है तो यह खुफिया तंत्र की नाकामी है। चाणक्य ने कहा है कि जिस राजा का खुफिया तंत्र कमजोर होता है उसके राज्य में हमेशा अशांति छाई रहती है और वह शत्रुओं से घिरा रहता है। उपद्रव होने से पहले ही उपद्रवियों को धरपकड़ लेना चाहिए और यह निर्भर करता है खुफिया तंत्र पर।

- बिपिन चंद्र जोशी, बेंगलूरु
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विवेक का इस्तेमाल करें लोग

सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं को प्रशासनिक स्तर पर सख्ती के साथ दबाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया इस में आग में घी डालने जैसा कार्य करता है। आपत्तिजनक कंटेंट पर निगरानी रखना आवश्यक है। लोगों को भी अफवाहों एवं कपोलकल्पित बातों से सावधान रहना चाहिए। अपने विवेक का सही इस्तेमाल करते हुए घटनाओं को सही परिप्रेक्ष्य में समझना लोगों के लिए आवश्यक है।

- ललित महालकरी, इंदौर
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जागरूकता और सहयोग की आवश्यकता

आमजन की जागरूकता एवं सहयोग से क्षेत्र में होने वाले सांप्रदायिक अपराध को रोका जा सकता है।क्षेत्र में किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां में कोई लिप्त पाया जाता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जा सकती है, ताकि समय रहते आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। ऐसी घटना अपने क्षेत्र में न हो इसके लिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म वॉट्सएप, टि्वटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर किसी भी तरह के तथ्यहीन, भ्रामक, झूठे एवं हिंसक, आपत्तिजनक, भड़काऊ मैसेज व वीडियो पोस्ट न करें और न ही अफवाहों को प्रसारित करने में अपना योगदान दें।

- डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर