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स्कूल डायरी में नवाचार बदल सकता है बच्चों का भविष्य

एक बेहतर डायरी के प्रत्येक पृष्ठ पर प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए प्रेरणास्पद सुविचार लिखे जा सकते हैं। इन सब बातों का समावेश कर स्कूल डायरी को शिक्षा के त्रिकोण यानी विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावकों के लिए बहुउपयोगी बनाया जा सकता है।

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प्रदीप कुमार बोरड़

सेवानिवृत्त आइएएस


आम धारणा यह रहती है कि स्कूली शिक्षा में बच्चों को दिए जाने वाले होमवर्क अथवा स्कूल में उनके कार्य-व्यवहार से अभिभावकों को अवगत कराने के लिए स्कूल डायरी रखी जाती है। स्कूल डायरी को सूचनाओं का बहुआयामी माध्यम बनाया जा सकता है। ऐसा माध्यम जिसके जरिए न केवल अभिभावक बल्कि शिक्षक और विद्यार्थी भी पठन-पाठन से जुड़े नवाचारों से अवगत हो सकें। ऐसी डायरी बच्चे को खेल खेल में बहुत कुछ सिखा सकती है और अभिभावकों के लिए भी मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकती है। यह इसलिए भी जरूरी है कि अभी तक स्कूल में बच्चों के बस्ते में मौजूद स्कूल डायरी की भूमिका केवल सूचनाओं का सम्प्रेषण और गृहकार्य की जानकारी देने तक ही सीमित रहती आई है। जबकि इस तरह की डायरी के माध्यम से शिक्षक प्रतिदिन अपने विद्यार्थियों के बारे में अभिभावकों के विचार प्राप्त कर सकते हैं।
डायरी के विभिन्न पन्नों पर विद्यार्थियों द्वारा अंकित मनोभावों का अध्ययन कर उनके भविष्य के लिए योजना बनाई जा सकती है। शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी की सक्रिय भूमिका को सुनिश्चित करने की दृष्टि से स्कूल डायरी में होने वाले नवाचारों में 'फिजिकल पैरामीटर ऑफ स्कूल' का उल्लेख करते हुए 'स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मन' की अवधारणा का महत्त्व समझते हुए विद्यार्थियों में आउटडोर और खेलकूद की गतिविधियों में रुचि बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि स्कूलों में सदन व्यवस्था या हाउस सिस्टम केवल विद्यार्थियों के समूह बनाने की व्यवस्था ही न हो बल्कि यह सिस्टम विद्यार्थियों को सीखने- सिखाने की एक नई अवधारणा प्रस्तुत करे। सदन व्यवस्था के जरिए विद्यार्थियों को समूह में अधिक एकजुटता से कार्य करने की प्रेरणा मिलनी चाहिए। बच्चों में निबंध लेखन, पोस्टर, वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं वर्षभर आयोजित करवाई जा सकती हैं।
डायरी में 'माई एचीवमेंट' शीर्षक के अन्तर्गत विद्यार्थी इस जानकारी का भी संकलन रखें कि वर्षभर में अपनी पाठ्य पुस्तकों से इतर उन्होंने किन-किन पुस्तकों को पढ़ा, स्कूल की किन-किन गतिविधियों में भाग लिया। इन गतिविधियों में सक्रियता के कारण पुरस्कार मिला हो तो उसका भी ब्योरा हो। इसी तरह 'माई थॉट' शीर्षक के अन्तर्गत अभिभावक अपने बच्चे के बारे में और सहपाठी अपने मित्र के बारे में अपने विचार लिख सकते हैं। इससे शिक्षक, विद्यालय और विशेषज्ञ को विद्यार्थी को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही 'जॉय ऑफ गिविंग' शीर्षक के अन्तर्गत विद्यार्थी मदद या दान देने की ऐसी घटनाओं का विवरण लिख सकते हैं, जिससे उन्हें दयाभाव और कृतज्ञता भाव की अनुभूति हुई हो।
विद्यार्थी को अपने नाम के इर्द-गिर्द ज्ञान का ताना-बाना इस प्रकार बुनना होगा जिससे उसका आत्मविश्वास और स्वाभिमान बढ़े। डायरी में इस शीर्षक को 'आइ एम प्राउड ऑफ' दिया जा सकता है। डायरी के माध्यम से अभिभावकों को अवसर दिया जा सकता है कि वे अपने बच्चों में अच्छी आदतों का विकास करें। डायरी का एक हिस्सा 'गेम्स एंड पजल्स' के रूप में भी हो। रचनात्मक अभिवृद्धि के लिए कार्टून अथवा चित्रांकन, डूडल्स के जरिए अपनी संवेदनाओं को प्रकट करने का माध्यम हो सकता है। एक बेहतर डायरी के प्रत्येक पृष्ठ पर प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए प्रेरणास्पद सुविचार लिखे जा सकते हैं। इन सब बातों का समावेश कर स्कूल डायरी को शिक्षा के त्रिकोण यानी विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावकों के लिए बहुउपयोगी बनाया जा सकता है।