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Patrika Opinion : डराने वाले हैं सोशल मीडिया के खतरे

इंस्टाग्राम बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार कर रहा है। फेसबुक के ही स्वामित्व वाले इस फोटो व वीडियो शेयरिंग एप का इस्तेमाल करते हुए बच्चे डिप्रेशन तक के शिकार हो रहे हैं।

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Patrika Opinion : डराने वाले हैं सोशल मीडिया के खतरे

Patrika Opinion : डराने वाले हैं सोशल मीडिया के खतरे

सोशल मीडिया से चिपके रहने से सबकी दिनचर्या तो प्रभावित हो ही रही है, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी हर वर्ग के लिए समस्याएं खड़ी होने लगी हैं। फेसबुक का सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़ा यह अध्ययन सचमुच चिंतित करने वाला है कि इंस्टाग्राम बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार कर रहा है। फेसबुक के ही स्वामित्व वाले इस फोटो व वीडियो शेयरिंग एप का इस्तेमाल करते हुए बच्चे डिप्रेशन तक के शिकार हो रहे हैं। बच्चों में अवसाद, चिंता व अकेलेपन की समस्याएं देखने में आ रही हैं। सुंदर दिखने का दबाव किशोरियों को अवसाद की तरफ धकेल रहा है। सोशल मीडिया से जुड़ा यह प्रभाव चौंकाने वाला नहीं है। असल में समय-समय पर इस तरह के शोध सामने आते रहते हैं, जो सोशल मीडिया के कारण लोगों की बिगड़ती सेहत की तरफ ध्यान आकर्षित करते हैं।

वर्तमान में सोशल मीडिया संवाद का ताकतवर माध्यम बन चुका है। इंस्टाग्राम ही नहीं, दूसरे तमाम मंचों पर सभी वर्गों से जुड़े लोग खुलकर अपने बारे में बता रहे हैं। अपने विचारों के साथ पसंद-नापसंद तक शेयर कर रहे हैं। किशोरवय में तो यह नशा जैसे सिर चढ़कर बोलता है। तमाम अच्छी बातोंं को ग्रहण करना जितना मुश्किल होता है, उतना ही आसान बुराइयोंं को अपनाना होता है। इसीलिए इस तथ्य के बावजूद कि सोशल मीडिया ने दुनिया की दूरियां कम कर दी हैं, इसके हजारों खतरे डराने वाले भी हैं। लेकिन, जब बड़े ही इस बुराई की लत पाल रहे हों, तो फिर बच्चों पर निगरानी भला कौन करे?

विचारों के आदान-प्रदान का जरिया व अभिव्यक्ति के बेहतर माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की बजाय आभासी दुनिया में रहना आपसी रिश्ते तक खत्म कर रहा है। इसका लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है। असल में कोविड के कारण इंटरनेट पर हर वर्ग का समय बढ़ गया। ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से बच्चों के लिए स्मार्टफोन या लैपटॉप की व्यवस्था भी करनी पड़ी। एक बड़ी वजह यह भी है कि इससे बच्चे इंस्टाग्राम जैसे मंच पर फोटो-वीडियो शेयर कर इस आभासी संसार के मायाजाल में उलझ गए। यह भी सही है कि अब बच्चों को इंटरनेट से दूर करना संभव नहीं है, लेकिन उनकी समझाइश तो जरूर की जानी चाहिए। यदि बच्चा सोशल मीडिया से चिपका नजर आए, तो सतर्क हो जाएं और इंटरनेट पर उसका समय तय कर दें। ऐसा तब होगा जब अभिभावक सोशल मीडिया के इन खतरों को देखते हुए खुद भी अनुशासित रहने का प्रयास करें। ऐसा होने पर ही वे बच्चों के लिए आदर्श पेश कर सकते हैं।