22 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Patrika Opinion चुनावी छाया से दूर दिखने वाला अंतरिम बजट

चुनावी वर्ष होने के कारण यह माना जा रहा था कि अंतरिम बजट में कुछ लोकलुभावन घोषणाएं हो सकती है, लेकिन सरकार ने परंपरा का निर्वहन करते हुए लेखानुदान ही पेश किया। बड़ी लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज करके सरकार ने चकित जरूर किया।

2 min read
Google source verification

image

Gyan Chand Patni

Feb 01, 2024

Patrika Opinion चुनावी छाया से दूर दिखने वाला अंतरिम बजट

Patrika Opinion चुनावी छाया से दूर दिखने वाला अंतरिम बजट

चुनावी वर्ष होने के बावजूद केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार किसी हड़बड़ी में नहीं है। लोकसभा में पेश किए गए अंतरिम बजट में सरकार का भरोसा नजर आया है। न तो लोक लुभावन घोषणाओं से जनता को रिझाने का प्रयास किया गया है और न ही सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस हुई है। सरकार ने जनता को सुनहरे भारत की तस्वीर दिखाई है। इसके साथ ही भविष्य का रोडमैप तैयार करने के लिए पूर्ण बजट का इंतजार करने को कहा है। वैसे भी मोदी सरकार की नीति रेवडिय़ां बांटने वाली नहीं रही है, लेकिन फैसलों का अंदाज हमेशा चकित करनेवाला जरूर रहा है।

चुनावी वर्ष होने के कारण यह माना जा रहा था कि अंतरिम बजट में कुछ लोकलुभावन घोषणाएं हो सकती है, लेकिन सरकार ने परंपरा का निर्वहन करते हुए लेखानुदान ही पेश किया। बड़ी लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज करके सरकार ने चकित जरूर किया। पिछले अंतरिम बजट (2019) में जब यह उम्मीद की जा रही थी कि कोई बड़ी घोषणा नहीं होगी, सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए लोगों को चौंका दिया था। तब विपक्ष ने इस कदम को चुनावी फायदा लेने का प्रयास बताया था। इस बार सरकार के आश्वस्त होने की वजह भी है। 2019 में आए अंतरिम बजट से पहले जिन राज्यों में चुनाव हुए थे, उनमें तीन प्रमुख राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा के हाथ से सत्ता निकल गई थी। तब मोदी सरकार को रिपीट कराना भाजपा के रणनीतिकारों के लिए कठिन परीक्षा मानी जा रही थी। तब अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग को राहत देने वाले कई उपाय किए गए थे। इसका असर भी दिखा और मोदी सरकार न केवल रिपीट हुई, बल्कि जीत का रेकॉर्ड बनाया था। इस बार तीनों ही राज्यों के चुनावों में जीत से भाजपा के हौसले बुलंद हैं। विपक्ष बिखरा हुआ है और राम मंदिर की स्थापना के बाद से देश का राजनीतिक माहौल भाजपा के प्रति सकारात्मक दिख रहा है।

देखा जाए तो भारत में विकास की गति उतार-चढ़ाव वाली रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य पाने के लिए विकास दर में निरंतरता बनाए रखना बहुत ही जरूरी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल और दुनिया में चल रहे दो-दो युद्धों के बावजूद यह आंकड़ा तसल्ली देने वाला कहा जाएगा। हालांकि विकास को सिर्फ आंकड़ों में ही नहीं देखा जाना चाहिए। आम लोगों के जीवन स्तर में बदलाव भी मायने रखता है।