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इंटरपोल: कल्पना को मात देती वास्तविकता

इंटरपोल के वैश्विक सदस्य; 18 से 21 अक्टूबर तक नई दिल्ली में 90वीं महासभा, जो संगठन की सर्वोच्च शासी निकाय है, के लिए एकत्रित होंगे। इंटरपोल की स्थापना, क्षेत्रीय और वैश्विक पुलिस समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए, 1923 में की गई थी। लगभग एक सदी बाद भी, यह आवश्यकता निरंतर बढ़ती जा रही है, क्योंकि आपराधिक परिदृश्य लगातार तेज गति से उभर रहा है।

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Patrika Desk

Oct 16, 2022

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जुर्गन स्टॉक
महासचिव, इंटरपोल


चोरी के पासपोर्ट के इस्तेमाल के जरिए सीमा पार करने का प्रयास करते हुए एक आतंककारी को गिरफ्तार किया गया। ऑनलाइन पोस्ट की गई तस्वीरों के माध्यम से पहचाने जाने के बाद एक बाल-शोषण पीडि़त को बचाया गया। दुनिया भर में पीडि़तों को लक्षित करने वाले फिशिंग घोटाले से जुड़ी लाखों डॉलर की चोरी पकड़ी गई। यह किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि अपने 195 सदस्य देशों का समर्थन करने वाले इंटरपोल का रोजमर्रा का काम है। आज हम जिन खतरों का सामना कर रहे हैं, वे तेज, गतिशील, अपने-आप में सशक्त और परस्पर जुड़े हुए हैं। वास्तव में, हम आपराधिक खतरे से सम्बंधित परिदृश्य में अपूर्व जटिलता देख रहे हैं। इन वैश्विक खतरों से निपटने के लिए, इंटरपोल की गतिविधियां मुख्य रूप से तीन कार्यक्रमों पर आधारित है- आतंकवाद, साइबर अपराध और संगठित एवं उभरते अपराध।
दुनिया भर में आपराधिक गतिविधियों के बढ़ते समन्वय के जवाब में, इस साल की शुरुआत में इंटरपोल ने अपना वित्तीय अपराध और भ्रष्टाचार विरोधी केंद्र स्थापित किया। विश्व स्तर पर, अवैध वित्तीय लेन-देन के एक प्रतिशत से भी कम को रोकने और वसूली करने में सफलता मिलती है तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था इसके बढ़ते दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में विस्तारित कार्रवाई के लिए एक प्रमुख क्षेत्र है- आपराधिक संपत्तियों का पता लगाना, उन पर कब्जा करना और उन्हें जब्त करना। इसी पृष्ठभूमि में, इंटरपोल के वैश्विक सदस्य; 18 से 21 अक्टूबर तक नई दिल्ली में 90वीं महासभा, जो संगठन की सर्वोच्च शासी निकाय है, के लिए एकत्रित होंगे। इंटरपोल की स्थापना, क्षेत्रीय और वैश्विक पुलिस समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए, 1923 में की गई थी। लगभग एक सदी बाद भी, यह आवश्यकता निरंतर बढ़ती जा रही है, क्योंकि आपराधिक परिदृश्य लगातार तेज गति से उभर रहा है।