
आपकी बात: क्या विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी की अनदेखी हो रही है?
सरकार की मजबूरी
देश के पर्यावरण के समक्ष वर्तमान दौर में एक विचित्र चुनौती है। जो गतिविधियां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती हंै, उनके लिए भी आसानी से अनुमति मिल जाती है। देश के अनेक संरक्षित वनों एवं वन्य जीव क्षेत्रों में रेल लाइन, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण, बिजली उत्पादन जैसी परियोजनाओं को तेजी से क्रियान्वित किया जा रहा है। इनकी वजह से वनों और वन्य जीवों को नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरण संरक्षण के कानूनों को दरकिनार करके ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी देना सरकारों की मजबूरी भी है।
-नरेश कानूनगो, बेंगलूरू, कर्नाटक
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जरूरी है संतुलन
विकास योजनाओं के चलते पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। बढ़ती जनसंख्या की वजह से प्रकृति का दोहन ज्यादा हो रहा है। ध्यान रहे प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। अगर हमने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं बनाया तो संकट बढ़ सकता है।
-प्रतीक्षा, रायपुर, छत्तीसगढ़
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सरकार जिम्मेदारी निभाए
पर्यावरण विभाग यदि सतर्क और सक्रिय रहे और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाए, तो विकास परियोजनाओं में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की अनदेखी ही न हो। केंद्र व राज्य सरकारों का प्रथम दायित्व है कि बढ़ते दूषित पर्यावरण के दौर में वे यह सुनिश्चित करें कि आज की विकास योजनाएं अगली पीढ़ियों के लिए कहीं विनाश योजनाएं तो नहीं हैं।
-मुकेश भटनागर, भिलाई
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पर्यावरण की अनदेखी
विकास परियोजनाओं के नाम पर लगातार पर्यावरण की अनदेखी हो रही है। पर्यावरण का लगातार दोहन किया जा रहा है। विकास के नाम पर लाखों पेड तो काट दिए जाते हैं, परंतु उनके स्थान पर और पेड़ नहीं लगाए जाते। परियोजना पूरी हो जाती है, तो वृक्ष लगाना तक भूल जाते हैं। हमारी वन संपदा धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है। कई लोग पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन कोई उनकी बात पर ध्यान ही नहीं देता।
-तरुणा साहू, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
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विकास योजनाएं भी जरूरी
विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की अनदेखी हो रही है। यह कहना ठीक नहीं है। विकास परियोजनाओं को भी पूर्ण करना आवश्यक होता है ।
-श्रीकृष्ण पचौरी, ग्वालियर, मध्यप्रदेश
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विकास के साथ पर्यावरण भी जरूरी
पर्यावरण की अनदेखी करके होने वाला विकास प्रकृति और मानव के लिए घातक है। तेजी से विकास की सीढ़ियों पर चढ़ने वाला मानव पर्यावरण की अनदेखी करके अपने लिए ही संकट पैदा कर रहा है। पर्यावरण की अनदेखी के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। हर विकास की परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानक तय होने चाहिए और उनका कड़ाई से पालन होना चाहिए।
-माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, सीकर
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पर्यावरण संरक्षण जरूरी
हो सकता है कि कोई योजना सामाजिक, व्यापारिक या आर्थिक रूप से लाभदायक हो, लेकिन सबसे जरूरी है कि वह योजना पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचाती हो। एक तरफ हम चिड़ियाघर बनाकर जंगली जानवरों का ध्यान रखते हैं। दूसरी तरफ हम उनके घर यानी जंगलों का नुकसान पहुंचाते हैं।
-एस. पी. कुमावत, राजसमंद
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न हो खानापूर्ति
विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय मंज़ूरी को केवल एक औपचारिकता के तौर पर किया जाता हैं। इस दौरान पर्यावरण की चिंता करने की बजाय खानापूर्ति का ध्यान रखा जाता है। गंभीरता से यह जांचना जरूरी है कि किसी योजना की वजह से पर्यावरण को नुकसान तो नहीं पहुंचेगा। इसके लिए हमें नौकरशाही को संवेदनशील बनाना होगा ।
-रुचिका अरोड़ा, जयपुर
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जनता में जागरूकता नहीं
हमारे जीवन में पेड़-पौधों का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। सरकार पर्यावरण को बचाने के लिए कई योजनाएं भी बनाती हैं, कुछ पर अमल भी होता है। मुश्किल यह है कि पौधे ठीक तरह से नहीं लगाए जाते। जनता में जागरूकता भी नहीं है। इस वजह से योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
-गोपाल रैकवार, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी की अनदेखी हो रही है। नगरीय विकास के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर दी जाती है। इससे नगर का विकास तो हो जाता है, पर पर्यावरण बिगड़ जाता है।
-जायसवाल, कोरबा, छत्तीसगढ़
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नहीं रखा जाता ध्यान
विकास योजनाओं के दौरान पर्यावरण नियमों की पालन नहीं हो रही है। विडंबना यह है कि सभी खुद के विकास को अधिक प्राथमिकता देते हैं और पर्यावरण जैसे मामलों में लापरवाही करते हैं। ।
सरिता प्रसाद, पटना, बिहार
Published on:
06 Feb 2022 06:26 pm
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