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हिंसा की साजिश को बेनकाब करना जरूरी

- गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराने के मामले में मुख्य आरोपी दीप सिद्धू गिरफ्तार कर लिया गया।- लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का हक सभी को है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से।
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हिंसा की साजिश को बेनकाब करना जरूरी

हिंसा की साजिश को बेनकाब करना जरूरी

देर से ही सही, लेकिन गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर हुई हिंसा और धार्मिक झंडा फहराने के मामले में मुख्य आरोपी दीप सिद्धू को आखिर गिरफ्तार कर लिया गया है। किसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी को जो कुछ हुआ, उसका पूरा खुलासा होना चाहिए। सिद्धू की गिरफ्तारी से इस साजिश का खुलासा हो सकेगा कि आखिर इसके पीछे कौन था। पिछले दिनों सिद्धू सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कह चुका है। सिद्धू ने कहा था कि अगर उसने अपना मुंह खोला तो किसान आंदोलन चला रहे नेता को भागने का मौका भी नहीं मिलेगा।

लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का हक सभी को है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से। गणतंत्र दिवस पर लालकिले के घटनाक्रम ने देश को शर्मसार किया था। ट्रैक्टर रैली के बहाने उस दिन दिल्ली में जो हुआ, उसमें साजिश की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली पुलिस को इस साजिश की तह तक जाकर दोषियों को सामने लाना चाहिए। यहां सवाल अकेले सिद्धू का नहीं है। देश को पता लगना चाहिए कि वे कौन-सी ताकतें हैं, जो गणतंत्र दिवस पर भारत को अपमानित करना चाहती थीं। क्या ऐसी साजिश रचने वाले लोगों के पीछे विदेशी ताकतें भी थीं? आजादी के बाद से देश आंदोलनों के लंबे दौर का गवाह रहा है। सरकार किसी भी दल की रही हो, राजनीतिक दलों से लेकर श्रमिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किए हैं। धरने-प्रदर्शन भी हुए और गिरफ्तारियां भी दी गईं, लेकिन कम ही मौके आए जब आंदोलनकारियों ने देश को शर्मसार किया हो। भारत महात्मा गांधी का देश है। इस देश की अपनी विशेष पहचान है। आजादी के बाद देश ने अनेक मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। कुछ देश भारत की तरक्की से खुश नहीं हैं। ऐसे देश हमारे यहां के कुछ लोगों को उकसाकर समय-समय पर भारत की छवि खराब करने के प्रयास करते रहते हैं। गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा उन्हीं प्रयासों का हिस्सा नजर आती है।

इस बात की उम्मीद है कि सरकार सारे मामले की जांच शीघ्रता से कराएगी और सभी सबूतों को देश के सामने रखेगी। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि इतनी बड़ी हिंसा की तैयारी का पता लगाने में दिल्ली पुलिस विफल क्यों रही? लालकिले पर हुई हिंसा राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है। ऐसे में सभी पहलुओं की जांच करके सरकार दोषियों की पहचान करे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाए। ताकि भविष्य में फिर देश विरोधी ताकतें राष्ट्रीय पर्व पर यूं हिंसा फैलाने की जुर्रत ना कर सकें।