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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : धर्म का मर्म : धार्मिक ज्ञान के आधार पर आसक्ति मुक्त होना, राग-द्वेष के बाहर रहकर जीना ही आत्मा का विकास है। ऐश्वर्य या ईश्वर का अंश है। हर व्यक्ति अपने संचित कर्म साथ लेकर पैदा होता है। कुछ नए कर्म भी करता है। दोनों का योग उसका भाग्य बनता है। धर्म का अर्थ उसके कर्म से जुड़ता है।
Published on:
03 Jul 2026 06:50 pm
