
jagmeet singh canada
- अतुल कौशिश, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक टिप्पणीकार
जगमीत की विजय से कनाडा को बहुनस्लीय देश के रूप में आगे बढऩे में मदद मिलेगी। वे अब २०१९ में होने वाले चुनाव में जस्टिन ट्रूडू को प्रधानमंत्री पद के एक गंभीर उम्मीदवार के रूप में चुनौती देंगे। वे आगे की रेस में कहां तक पहुंच पाएंगे यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा।
कनाडा के तीसरे सबसे बड़े राजनीतिक दल ‘नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी’ (एनडीपी) का प्रमुख बनने पर जगमीत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी। जगमीत, पंजाब से कनाडा गए एक सिख प्रवासी की संतान हैं। जब १ अक्टूबर को उनके विजय होने का समारोह चल रहा था तो उनके पहनावे को लेकर नस्लीय टिप्पणी की गई तो जगमीत ने ‘प्रेम’ का संदेश देकर टिप्पणीकर्ता को निरुत्तर कर दिया।
जगमीत की विजय से कनाडा को बहुनस्लीय देश के रूप में आगे बढऩे में मदद मिलेगी। वे अब २०१९ में होने वाले चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू को प्रधानमंत्री पद के एक गंभीर उम्मीदवार के रूप में चुनौती देंगे। वे आगे की रेस में कहां तक पहुंच पाएंगे यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। पर इस समय एनडीपी सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के लिए गंभीर चुनौती देने वाले दल के रूप में नहीं दिख रही । वर्ष १९७२ से १९७४ के बीच थोड़े समय के लिए एनडीपी संघीय सरकार में हिस्सेदार रही थी और उस सरकार का नेतृत्व पियरे ट्रूडू कर रहे थे जो जस्टिन ट्रूडू के पिता थे।
वर्ष २०११ में एनडीपी को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त था पर अगले आम चुनाव में इसकी ५९ सीटें कम हो गई जिससे यह अपना दर्जा बरकरार नहीं रख पाई। आगामी चुनाव से पहले जगमीत को श्वेत लोगों में आधार मजबूत करके खुद को गंभीर और स्वतंत्र पहचान वाले नेता के रूप में स्थापित करना होगा। उनके दल को अभी सिखों सहित अल्पसंख्यकों और हाशिए पर पड़े लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। जगमीत ने अभी भारतीय राजनीति पर ज्यादा कुछ नहीं बोला है पर वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आलोचक के रूप में जाने जाते हैं।
मोदी ने २०१५ में जब कनाडा की यात्रा पर थे तब उन्होंने कनाड़ा सरकार से भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाने की मांग की थी। भारत में ऑब्जर्वर्स का मानना है कि कनाड़ा की सरकार वहां खालिस्तान के समर्थन में चलने वाले अभियान के प्रति अनजान बनी रहती है। जगमीत ने एक प्रस्ताव का समर्थन करते हुए १९८४ के सिख विरोधी दंगों को जनसंहार कहा था। यह वाकया अप्रेल के माह में हुआ था जब ओंटारियो प्रांतीय विधानसभा की एक सिख महिला सदस्य ने यह प्रस्ताव रखा था। यह महिला लिबरल पार्टी से थी। जगमीत के गृह राज्य ओंटारियो में जस्टिन ट्रूडू ने खालिस्तान समर्थकों के एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था। वर्ष २०१३ में जगमीत को भारत आने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया था।
जगमीत ने यूपीए सरकार में मंत्री रहे कमलनाथ की कनाडा यात्रा के दौरान सक्रिय रूप से विरोध किया था। कनाडा में रहने वाले कई अन्य खालिस्तान से सहानुभूति रखने वालों और कार्यकर्ताओं की भांति ही जगमीत सिंह १९८४ के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे को ‘युद्ध अपराध’ या ‘जनसंहार’ के रूप उठाते रहे हैं। जब ओंटारियो प्रांतीय विधानसभा में भारत विरोधी प्रस्ताव पारित हुआ था तब भारत सरकार ने कनाडा सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी पर भारतीय आपत्ति ज्यादा प्रभावी नहीं रही । इसका एक कारण यह भी है कि कनाडा एक उदारवादी और सहिष्णु समाज माना जाता है जो खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं को पूरी आजादी देता है। भारत से अलग होने के लिए चल रहा खालिस्तान आंदोलन जब कमजोर पड़ गया तो इसके अधिकतर नेता पश्चिमी देशों और कनाडा में गए। कनाडा जाने वाले नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा रही।
भारतीय मीडिया में ऐसी रिपोर्ट छपती रही हैं कि कनाडा में बड़ी संख्या ऐसे नेता जाते रहे हैं जिनका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निरंतर संपर्क बना हुआ है। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह भारत आए तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह कहकर उनका विरोध किया कि वे खालिस्तानियों से सहानुभूति रखते हैं और उनसे मिलने से इनकार कर दिया। कुछ लोगों का मानना है कि यह दोनों की आपसी नाराजगी है पर इस बात का कुछ तो आधार होगा ही। इसके बाद में हरजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी देश को तोडऩे वाले लोगों को बढ़ावा नहीं देते हैं। एक संघीय सरकार में मंत्री होने के नाते हरजीत सिंह के पास इस तरह का बयान देने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं था।
भारत सरकार के लिए चिंता का विषय यह कि कनाडा सरकार ने अलगाववादी कार्यकर्ताओं और खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं। जगमीत सिंह के विजय समारोह में खालिस्तान समर्थकों की संख्या ठीकठाक थी जिसमें सुखविंदर सिंह भी उपस्थित था जो आजाद खालिस्तान का समर्थक माना जाता है। कनाडा के जनप्रतिनिधि यह विश्वास रखते दिख रहे हैं कि भारत में सिखों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव और अत्याचार किया जाता है जो कि गलत है।
कनाडा में खालिस्तानी संगठनों की अच्छी-खासी संख्या देखी जा सकती है और इनके कनाडा के प्रभावशाली नेताओं से संपर्क हैं जिसमें जगमीत भी शामिल है। बहरहाल जगमीत ने कहा है कि उनके साथ बचपन में नस्ल के आधार पर भेदभाव हुआ है और वो इसे ठीक करेंगे पर ऐसे पूवाग्रहों को मिटाना इतना आसान भी नहीं है।

Published on:
06 Oct 2017 12:41 pm
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