राजस्थान व गुजरात की सीमा पर बांसवाड़ा जिले की आनंदपुरी पंचायत समिति क्षेत्र की पहाड़ी पर मानगढ़ धाम पर 17 नवंबर 1913 में गोविन्द गुरु के नेतृत्व में अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए करीब 1500 आदिवासी शहीद हुए थे। कहा जाता है कि यह घटनाक्रम जलियावाला बाग से भी बड़ा था।
मानगढ़ से जुड़े अधिकृत दस्तावेज दिल्ली के अभिलेखागार से जुटाने के बाद विकास के मामले में सरकार की विशेष नजर इस पर है। 20 दिसम्बर 1858 को बंजारा परिवार में जन्मे गोविन्द गुरू का लक्ष्य देश की आजादी और व्यसनमुक्त समाज की स्थापना करना था। उन्होंने लोगों को विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए प्रेरित किया। राजस्थान पत्रिका समूह की पहल के बाद शहादत के 102 वर्षों में पहली बार 15 अगस्त 2015 को यहां ध्वजारोहण कर शहीदों को नमन किया गया।