11 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पेशेवर उत्कृष्टता का सम्मान

भारतीय मूल की हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वित्त के क्षेत्र में अपना कॅरियर तब चुना, जब देश वर्ष 1990-91 में भुगतान संकट के हालात से जूझ रहा था।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Sunil Sharma

Oct 06, 2018

opinion,work and life,rajasthan patrika article,gita gopinath

Gita gopinath

- टीएस प्रीता

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने पिछले दिनों भारतीय मूल की हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ को अपना मुख्य अर्थशास्त्री नियुक्त करने की घोषणा की। गीता इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बाद दूसरी भारतीय हैं। निश्चय ही यह उनकी पेशेवर उत्कृष्टता का सम्मान है। बहुआयामी अनुभव की धनी गीता ने विनिमय दरों, व्यापार, निवेश आदि विषयों पर दर्जनों शोध पत्र लिखे हैं। नित नया चलन शुरू करना इस मलयाली पुत्री के लिए चुटकी बजाने जितना सरल है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्त के क्षेत्र में अपना कॅरियर तब चुना, जब देश वर्ष 1990-91 में भुगतान संकट के हालात से जूझ रहा था। यह वही दौर था, जब भारत को अपना सोना गिरवी रखकर आइएमएफ से ऋण लेना पड़ा था। उसके तुरंत बाद ही देश आर्थिक उदारीकरण के रास्ते पर चल पड़ा। तब उन्होंने पहले शिकागो विश्वविद्यालय और बाद में वर्ष 2005 में वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मामलों में नामचीन हस्ती गीता गोपीनाथ का नाम मलयाली लोगों के लिए तब और भी जाना-पहचाना हो गया, जब 2016 में केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने उनको अपना मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया। यह उनका भारत में किसी भी किस्म का पहला सरकारी जुड़ाव था। कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री द्वारा नवउदारवादी अर्थशास्त्री को सलाहकार नियुक्त किए जाने से कइयों की भृकुटियां तन गईं और पार्टी काडर में बवाल भी मचा। पार्टी के नेताओं के लिए गीता, उन सभी बातों की वाहक थीं, जिन्हें वे साम्यवाद और समाजवाद विरोधी मानते रहे थे। उनका अमरीकी सरकार, पूंजीवादी संस्था आइएमएफ और वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम से जुड़ाव, पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कान खड़े करने जैसा ही था। केरल की पुत्री होना और नोटबंदी की कड़े शब्दों में आलोचना करना ही ऐसा पहलू था, जिसने बहुतों को उनका प्रशंसक बनाया।

नई नियुक्ति के साथ वे मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार का पद छोड़ रही हैं। कई के मन में सवाल है कि अर्थशास्त्र की यह स्कॉलर और विश्लेषक आइएमएफ के नीतिगत विषयों पर कैसे फैसले लेगी? गीता की यह उपलब्धि भारत और विकासशील दुनिया के लिए क्या मायने रखेगी? इसका उत्तर तो समय ही देगा। फिलहाल, यह समय तो गीता गोपीनाथ के रूप में देश की इस नई नवेली ‘पोस्टर गर्ल’ का है।