
Justice Joseph
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए वरीयता नहीं बल्कि मेरिट को आधार बनाया जाता रहा है। संविधान के अनुच्छेद 124(3) में इतना ही कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट जज के लिए हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। वकीलों के लिए यह अनिवार्यता दस साल की प्रेक्टिस की है। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनाने की शीर्ष अदालत की कॉलेजियम की सिफारिश केन्द्र सरकार ने लौटा दी है। इसे लौटाने के आधार चाहे जो बताए जाएं लेकिन यह सही है कि केन्द्र सरकार एक बार ही कॉलेजियम की सिफारिश को लौटा सकती है।
जस्टिस के.एम. जोसेफ वर्ष 1958 में जन्मे और दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 1982 में वकील के रूप में प्रेक्टिस शुरू की। उनके पिता के.के. मैथ्यू भी सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्ष 1986 से के.एम. जोसेफ ने स्वतंत्र वकालत शुरू कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2004 में उन्हें केरल हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। नौ साल तक हाईकोर्ट जज रहने के बाद जोसेफ 2014 में उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। कॉलेजियम ने उनकी सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में पदोन्नति की सिफारिश में साफ कहा है कि हाईकोर्ट के 42 न्यायाधीश व 10 मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जोसेफ से सीनियर हैं, फिर भी योग्यता के मापदण्डों पर जस्टिस जोसेफ खरे उतरते हैं।
केन्द्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश लौटाकर अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है लेकिन सवाल इसीलिए उठ रहे हैं क्योंकि उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखण्ड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ फैसला दिया था। यहां मुद्दा यह अहम है कि 10 जनवरी 2018 को कॉलेजियम ने जो सिफारिश भेजी, उस पर सरकार लंबे समय चुप क्यों रही। सरकार ने सिफारिश लौटाने के पक्ष में जो कारण बताए, अधिकांशत: अव्यावहारिक हैं।
विपक्ष इसे जस्टिस जोसेफ के राज्य केरल से सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही प्रतिनिधित्व के तर्क को भी अनुचित बता रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा व जस्टिस जोसेफ दोनों के नाम कॉलेजियम ने साथ भेजे थे, पर एक को स्वीकारने और दूसरे को लौटाने का कारण समझ से बाहर है। जजों की नियुक्ति पर तकरार ठीक नहीं है। इससे इस अवधारणा को बल मिलता है कि आपातकाल के दौर की तरह सुप्रीम कोर्ट को परोक्ष रूप से पंगु बनाया जा रहा है।
Published on:
28 Apr 2018 11:39 am
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
