हाड़ौती की जीवनरेखा चम्बल में कोटा शहर के 18 नालों का गिरना, चन्द्रलोई में औद्योगिक अपशिष्ट का बहना और मारवाड़ की लूनी, जोजरी व बांडी नदियों में रंगाई-छपाई इकाइयों का जहरीला पानी, ये सब मिलकर भयावह तस्वीर पेश करते हैं। चिंता इस बात की भी है कि नदियों में अपशिष्ट का प्रवाह सिर्फ पर्यावरणीय संकट ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और हमारी पीढ़ियों के अस्तित्व का भी सवाल है। राज्य में कॉमन एफलुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जैसे समाधान वर्षों से मौजूद हैं, लेकिन उनकी कार्यक्षमता और निगरानी पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।