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कमल और लिली के फूलों से लदी झील लोकताक

मोइरांग लोकताक झील के किनारे स्थित है, जो दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक ताजे पानी की झीलों में से एक है। यह बारिश के आधार पर 250 से 500 वर्ग किलोमीटर के बीच फैला हुआ है। लेकिन, इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस झील में दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है - केयबुल लामजाओ।

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Patrika Desk

Jan 03, 2023

कमल और लिली के फूलों से लदी झील लोकताक

कमल और लिली के फूलों से लदी झील लोकताक


शिवा यादव
अनसुनी कहानियां चुनता
और बुनता स्टोरीटेलर


चलिए आज मैं आपको भारत के उत्तर पूर्व भाग में सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर ले चलता हूं। मणिपुर की राजधानी इंफाल से लगभग 50 किलोमीटर दूर मोइरांग नाम का एक कस्बा है। मोइरांग स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह वही मोइरांग है, जहां पर भारतीय राष्ट्रीय सेना (आइएनए) का ध्वज पहली बार 14 अप्रेल, 1944 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करिश्माई नेतृत्व में फहराया गया था। यहां आइएनए संग्रहालय बनाया गया है, जहां आप उस समय के पुराने चित्र, पत्र और बहुत कुछ पा सकते हैं।
मोइरांग लोकताक झील के किनारे स्थित है, जो दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक ताजे पानी की झीलों में से एक है। यह बारिश के आधार पर 250 से 500 वर्ग किलोमीटर के बीच फैला हुआ है। लेकिन, इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस झील में दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है - केयबुल लामजाओ। हां! केयबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान वास्तव में लोकताक झील पर तैरता है, क्योंकि यह झील 'फुमदी ' से ढकी हुई है जो मिट्टी और वनस्पति का जैविक बायोमास है। फुमदी इतनी मोटी है कि यह कई बड़े और छोटे द्वीपों का निर्माण करती है, जो वनस्पतियों और जीवों और यहां तक कि जंगली जानवरों का घर बन जाती है। यह सांगाई का घर भी है, जो एक दुर्लभ लुप्तप्राय हिरण और मणिपुर का राज्य पशु है। स्थानीय मछुआरे वस्तुत: इस फुमदी पर अपना घर बनाते हैं, क्योंकि इससे उन्हें मछली पकडऩा बहुत आसान हो जाता है, क्योंकि वे झील के ठीक बीच में रहते हैं। इन मछुआरों ने पर्यटकों के लिए फ्लोटिंग होम स्टे भी बनाए हैं, ताकि वे इस झील के ठीक बीच में रहकर रोमांटिक सन सेट और मंत्र मुग्ध कर देने वाले सूर्योदय का आनंद ले सकें। यकीन मानिए, लोकताक पर रहना वाकई जादुई दुनिया में रहना है।
एक और चीज जो लोकताक को प्राप्त है वह है कमल और लिली के फूल, जिनसे झील भर जाती है। कमल से भरा सरोवर, जहां तक आपकी नजर जाती है कमल ही कमल नजर आते हैं। इन हजारों फूलों के बीच नौका विहार करना और ताजा कमल तोडऩा बेहद सुखद अनुभव है। इस झील के किनारे रहती है बिजयशांति जो लोकताक के पास रहने वाले अन्य सभी लोगों की तरह एक साधारण मछुआरे परिवार से आती है। मैं उसे 'कमल की रानी ' कहना चाहूंगा। क्यों? क्योंकि उसने कमल के तनों से जैविक रेशम बनाने की कला सीखी है, जो अत्यंत दुर्लभ है, और ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है। वह कमल की पंखुडिय़ों से स्वादिष्ट और सेहतमंद चाय भी बनाती है।
यह 100 प्रतिशत जैविक और टिकाऊ रेशम हस्तनिर्मित है और सामान्य रेशम की तुलना में 10 गुना अधिक महंगा है। बिजयशांति ने अपने गांव की महिलाओं को मछली पकडऩे के अलावा एक वैकल्पिक काम दिया है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकती हैं। वह 'कमल रानी ' की उपाधि की हकदार है, जब भी आप लोकताक झील की यात्रा करें, और इसके जादू का भी अनुभव करें। 2023 की शुभकामनाएं! अगली कहानी तक, ख़ुशियां, आलवेज।