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नेतृत्व: क्यों जरूरी है जागरूकता और स्वीकृति का गुण

Leadership: नियंत्रित नहीं की जा सकने वाली स्थितियों के प्रति जागरूकता और स्वीकृति का गुण विकसित करके, एक प्रबंधक और लीडर शक्ति का निर्माण कर 'कर्म योगी' बनकर दूसरों को प्रोत्साहन दे सकता है।

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प्रो. हिमांशु राय
(निदेशक, आइआइएम इंदौर)
Leadership: हम काफी समय से नियंत्रण विरोधाभास और सफल नेतृत्व वाले संगठनों पर इसके प्रभाव की चर्चा कर रहे हैं। जैसे ही एक उत्कृष्ट लीडर यह समझ जाता है कि हर स्थिति, हर परिप्रेक्ष्य को पूर्णत: नियंत्रित नहीं किया जा सकता, वह एक कदम सफलता की ओर बढ़ा लेता है - खुद की और अपने संगठन की भी। वह अपनी और अपने अधीनस्थों की ऊर्जा का प्रयोग संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में करता है और इससे समग्र प्रगति भी होती है। वह अपने सहकर्मियों को प्रेरित कर सकता है और उनके समक्ष ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है, जो उनके गुणों को भी विकसित करें। कुछ तरीकों से ऐसी विशेषता विकसित की जा सकती है।

कर्म योग : इसकी शुरुआत कर्म योग के अभ्यास से की जा सकती है और यह इसका एक प्रभावी समाधान हो सकता है। हालांकि इसमें समर्पण और समय का निवेश शामिल है। एलन वीस ने पुस्तक 'फीयरलेस लीडरशिप' में इसका वर्णन किया है और कहा है कि प्रारंभिक स्तर पर एक लीडर की मानसिकता में कुछ बदलावों पर विचार किया जा सकता है।

उद्देश्य और दृष्टि पर दें ध्यान : विशिष्टताओं पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करके एक लीडर को परिप्रेक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए। उद्देश्य और लक्ष्यों की स्पष्टता के साथ, कोई भी व्यक्ति बहुत अधिक अभिभूत या विचलित हुए बिना संकटों या व्यवधानों का सुदृढ़ प्रबंधन कर सकता है।

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गुणी और उत्पादक अधीनस्थों पर विश्वास : जैसा कि एक लीडर हमेशा यह उम्मीद करता है कि आम तौर पर उसके सभी अधीनस्थों के मध्य उसकी सकारात्मक छवि है और उन्हें भरोसा है कि लीडर का कोई भी निर्णय पक्षपातपूर्ण नहीं होगा, उसी प्रकार, एक लीडर से भी अपेक्षा की जाती है कि वह सभी कर्मचारियों का समर्थन करे। एक लीडर को उत्पादन और कर्मचारियों के लिए चिंता के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।

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समस्याओं के मूल कारणों की समझ : जब प्रारंभिक तौर पर आपकी योजना सफल होती न नजर आए, तो एक प्रबंधक को समस्या पर विचार किए बिना कड़े नियंत्रण की बजाय पहले मूल कारण का निदान करना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी या अधीनस्थ 'सक्षम' है, फिर भी प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो वह किसी संकट में हो सकता है या रवैए की समस्या हो सकती है। इसके लिए कर्मचारी से निरंतर रिपोर्ट मांगना उचित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी समस्या को समझते हुए आपको अपना समर्थन व्यक्त कर, वास्तविक समस्या का समाधान करने की आवश्यकता है। नियंत्रण करना आवश्यक है, लेकिन सही जगह और सही तरीके से। केवल शक्ति का दुरुपयोग करना प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

आकस्मिक योजनाएं रखें तैयार : जैसा कि पहले चर्चा की गई है, एक आकस्मिक योजना का होना मजबूती और लचीलापन विकसित करने का अधिक प्रभावी और कुशल तरीका हो सकता है। यह व्यवधानों और आपदाओं के बीच बदलती आवश्यकताओं और विवरणों को समायोजित करने में मदद करता है।

नियंत्रित नहीं की जा सकने वाली स्थितियों के प्रति जागरूकता और स्वीकृति का गुण विकसित करके, एक प्रबंधक और लीडर शक्ति का निर्माण कर 'कर्म योगी' बनकर दूसरों को प्रोत्साहन दे सकता है। इस दृष्टिकोण का उपयोग करके निडर, भावनात्मक रूप से बुद्धिमान और परिवर्तनकारी नेतृत्व के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण किया जा सकता है।