13 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संपादकीय : दहेज के मामलों में कानून के दुरुपयोग पर वाजिब चिंता

दहेज प्रताडऩा की शिकार होने वाली महिलाओं के लिए कानून रक्षा कवच है, पीडि़त महिला को न्याय मांगने का अधिकार है लेकिन कानून का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों को फंसाने के मामलों पर रोक लगाने की जरूरत है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज प्रताडऩा के साथ बलात्कार के आरोप जोडऩे पर चिंता जताते यह आकलन भी किया है कि ससुराल वालों से भारी रकम वसूलने के लिए इस तरह के मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Jul 13, 2026

Dowry Case

दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज प्रताडऩा के मामलों के साथ बलात्कार और यौन उत्पीडऩ जैसे गंभीर आरोप जोडऩे की दुष्प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। इससे पहले भी देश की अदालतें समय-समय पर इसको लेकर चिंता जताती रही हैं। देश की सर्वोच्च अदालत भी दहेज उत्पीडऩ के मामलों में अदालतों को सावधानी बरतने के निर्देश दे चुकी है। दहेज प्रताडऩा की शिकार होने वाली महिलाओं के लिए कानून रक्षा कवच है, पीडि़त महिला को न्याय मांगने का अधिकार है लेकिन कानून का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों को फंसाने के मामलों पर रोक लगाने की जरूरत है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज प्रताडऩा के साथ बलात्कार के आरोप जोडऩे पर चिंता जताते यह आकलन भी किया है कि ससुराल वालों से भारी रकम वसूलने के लिए इस तरह के मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।
विवाह के वक्त कन्या को उपहार देने की परिपाटी भले ही शगुन के तौर पर शुरू हुई होगी लेकिन धीरे-धीरे दहेज लेने और देने ने एक अभिशाप का रूप ले लिया। यह सब समाज में स्टेटस सिंबल बन गया। दहेज की आड़ में विवाह जैसा पवित्र बंधन अगर धन लिप्सा का रूप लेने लगे तो इसकी निंदा होना स्वाभाविक है। हमारे देश में आदिकाल से महिलाओं को सम्मान दिया जाता रहा है। हमारे शास्त्रों में यह उल्लेख भी है कि ‘जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।’ कुछ लोभियों ने दहेज प्रताडऩा के मामलों को धन कमाने का अवसर बना लिया। यह भी सही है कि दहेज में कमी को लेकर विवाहिताओं को ससुराल पक्ष की ओर से प्रताडऩा देने के मामले आए दिन सामने आते हैं। अदालत का यही संदेश है कि दहेज के लिए पत्नी या बहू को प्रताडि़त करने वालों को सजा मिलनी चाहिए लेकिन कानून की आड़ में ससुराल पक्ष के दूसरे सदस्यों को फंसाने की चाल से सावधान रहने की जरूरत है। देश की सैकड़ों अदालतों में हर साल दहेज उत्पीडऩ के हजारों मामले दर्ज होते हैं। अनेक मामलों में अदालतों ने अपने निष्कर्ष में माना है कि पति-पत्नी के बीच कलह अथवा गलतफहमी के चलते भी महिलाएं अपने ससुराल वालों को सबक सिखाने के इरादे से भी दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करा देती हैं। ऐसे मुकदमों का सीधा मतलब ससुराल वालों की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करना अथवा समझौते के नाम पर मुआवजे के रूप में बड़ी धनराशि वसूलना होता है।
देश में फर्जी मामलों में हो रही बढ़ोतरी एक गंभीर बीमारी का रूप लेती जा रही है। महिलाओं को शोषण से बचाना सरकार और अदालतों की जिम्मेदारी है लेकिन ये सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि निर्दोष लोग झूठे आरोपों का शिकार नहीं बनें। इसका निदान सिर्फ कानून के सहारे संभव नहीं है। सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता से ही ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है जो सबके लिए न्यायपूर्ण व निष्पक्ष हो।