16 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपकी बात…क्या लोकसभा एवं राज्य की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए

पाठकों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं आईं....पेश हैं चुनींदा प्रतिक्रियाएं
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

VIKAS MATHUR

Feb 05, 2024

आपकी बात...क्या लोकसभा एवं राज्य की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए

आपकी बात...क्या लोकसभा एवं राज्य की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए

चुनावी खर्च में आएगी कमी
चुनाव एक साथ होने से चुनावी खर्च में कमी आएगी। वोटर लिस्ट अपडेशन, पार्टियों के खर्च, सरकारी तंत्र की व्यवस्थाओं के खर्च, पुलिस विभाग के खर्चों में कमी आएगी। समय की भी बचत होगी। इससे विकास कार्यों, अनुसंधान, तकनीकी क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
संजय माकोड़े, बैतूल

...............................................................................

लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक
बार—बार चुनाव होने से सरकार के निर्णय प्रभावित होते हैं, एक साथ चुनाव कराने से ऐसा नहीं होगा। दूसरी ओर, दीर्घकाल में इससे क्षेत्रीय मुद्दों को नुकसान पहुंचेगा और क्षेत्रीय दल भी धीरे—धीरे समाप्त हो जाएंगे। पांच वर्ष में चुनाव होने से सरकार के तानाशाह होने का खतरा भी है। यह लोकतंत्र के लिए हानि होगी।
हितेश कुमार, मंडार (सिरोही)

...........................................................................................................

विकास कार्य नहीं होंगे अवरुद्ध
चुनावी खर्चों में कमी करके इस धन का उपयोग जन कल्याण में किया जाना चाहिए। बार— बार लगने वाली आचार संहिता के कारण प्रशासनिक एवं विकास कार्य अवरुद्ध नही होंगे। सही अर्थो में संवेधानिक उधेश्यो की प्राप्ति की राह प्रशस्त होगी।।
कंचन राठौड़ जोधपुर

.......................................................................................................................

सरकारी खर्चों में आएगी कमी
एक साथ चुनाव कराने से, चुनावों मे होने वाले सरकारी खर्चो मे कमी आ जाएगी। सुरक्षा एजेंसियो व सरकारी कर्मचारियो का बहुत समय बच जाएगा ।
रमेश पुरोहित, बैंगलूरु

..........................................................................................

चुनावों में ही जनप्रतिनिधि जनता के संपर्क में
जनप्रतिनिधि चुनाव आचार-संहिता से चुनाव परिणाम तक ही आमजन के संपर्क में रहते हैं। अर्थव्यवस्था का केन्द्रीयकरण होने से आमजन सरकार पर अधिक निर्भर हो गया है। चुनाव होने के भय से जनप्रतिनिधि लोकोपकारी कार्य करेंगे। वे आमजन के अधिक संपर्क में रहेंगे। चुनाव खर्च का हवाला दे लोकतंत्र को पंगु बनाने की चर्चा थमनी चाहिए।
राजीव रत्न, अजमेर

..................................................................................................................................

प्रशासनिक तंत्र की बढ़ेगी सक्रियता
चुनाव एक साथ होने से बार— बार लगने वाली आचार संहिता का दंश जनता को नही झेलना पड़ेगा। आर्थिक बोझ कम होगा, साथ ही मतदाताओं के समय की भी बचत होगी। प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता भी बढ़ेगी और शासन व्यवस्था में भी सुधार होगा।
प्रकाश भगत, कुचामन सिटी, नागौर

...................................................................................................

बार—बार चुनाव से होती है परेशानी
अलग—अलग चुनाव करवाने से सरकारी मशीनरी को दो माह के लिए निर्वाचन कार्यों में लगना पडता है। इससे देश के कई जरूरी कार्य आचार संहिता के कारण रुक जाते हैं।
चुनाव यदि एक साथ करवा लिया जाए तो करोड़ों रुपए के धन की बचत के साथ-साथ लोगों का समय भी बचेगा।
सुभाष बुड़ावन वाला ,रतलाम ,एमपी

..................................................................................................................
आमजन के कार्य होते हैं प्रभावित
चुनाव एक साथ होने चाहिए। राज्य सरकार के कर्मचारी बहुत ही ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं। इससे आमजन के अन्य जरूरी कार्य प्रभावित होते हैं। सरकार को लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराएं जाने चाहिए।

रविंद्रकुमार अग्रवाल, जवाहरनगर,जयपुर