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स्वस्थ जीवनशैली के साथ मोटे अनाज हैं सेहत का मंत्र

मोटे अनाज को आहार में नियमित इस्तेमाल करने के अत्यधिक लाभ हैं। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने, खनिज, फाइबर से युक्त होने और एंटीऑक्सीडेंट के कारण यह मोटापा, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करता है। यह अनाज अत्यधिक पौष्टिक होता है और अपने उ'च पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है।

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Gyan Chand Patni

Dec 20, 2023

स्वस्थ जीवनशैली के साथ मोटे अनाज हैं सेहत का मंत्र

स्वस्थ जीवनशैली के साथ मोटे अनाज हैं सेहत का मंत्र

डॉ. सुदर्शन मंडल

उपमहानिदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, स्वास्थ्य मंत्रालय भारत

संक्रमण की महामारी के साथ ही गैर-संचारी रोगों (नॉन-कम्युनिकेबिल डिजीज) अर्थात जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, स्ट्रोक, रक्तचाप, किडनी, लीवर और हृदय रोग के बढ़ते मामलों के अलावा पुरानी बीमारियों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। रोगों की विकरालता के कई कारकों में अस्वास्थ्यकर खानपान की मुख्य भूमिका है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को समान रूप से प्रभावित करती है। खानपान के कारण गैर-संचारी रोगियों की बढ़ती संख्या और अल्पपोषण की व्यापकता का परिणाम सामाजिक-आर्थिक भार के रूप में सामने आया है। पिछले तीन दशकों से 'यादा समय से प्रसंस्कृत भोजन या अस्वास्थ्यकर आहार की बढ़ती खपत का असर यह हुआ कि मोटे अनाज, दालों, फलों और सब्जियों का सेवन कम हो गया, मांस और लवणीय उत्पादों का सेवन बढ़ गया। इससे वसा से मिलने वाली ऊर्जा में लगभग 6 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि कार्बोहाइड्रेट से जो ऊर्जा मिलती थी, वह 7 फीसदी कम हो गई। गैर-संचारी रोगों की परिस्थितियों, बढ़ते शहरीकरण के कारण शारीरिक गतिविधियों में कमी का यह नतीजा निकला कि भारतीयों में मोटापा, एथेरोजेनिक डिस्लिपिडेमिया, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, टाइप-2 मधुमेह और कोरोनरी हृदयरोग के मामले बढ़ गए। इसके अलावा, कुपोषण, पश्चिमी शैली का खानपान, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करना, तम्बाकू और अल्कोहन का सेवन भी इस तरह के रोगों के कारण हैं।

खानपान से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन को बढ़ावा दिया है। स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि साबुत अनाज, नट्स, फलियां अत्यधिक पोषक होते हैं और ये हमें मधुमेह, कैंसर और हृदय रोगों जैसी गैर-संचारी बीमारियों से बचाते हैं। गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने पर फोकस करता है। इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) भी पौष्टिक खाद्य पदार्थों की व्यवस्था सुनिश्चित करता है। लोगों को स्वस्थ आहार लेने के लिए प्रेरित करने के प्रयास हो रहे हैं। मिलेट्स यानी मोटा अनाज स्वास्थ्यकर और अधिक गुणकारी विकल्प के रूप में फिर सामने आया है। मोटा अनाज पारंपरिक अनाज है, जो पिछले पांच हजार वर्ष से भी 'यादा समय से भारतीय उपमहाद्वीप में उगाया जाता रहा है और खाद्यान्न के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। अन्य फसलों की तुलना में इसमें पानी और रासायनिक इनपुट की कम जरूरत पड़ती है। श्री अन्न के रूप में भी चर्चित मोटे अनाज की 'यादातर फसलें देशज हैं और इन्हें लोकप्रिय पोषक अनाज के रूप में जाना जाता है। मोटा अनाज सूखा-सहिष्णु, जलवायु-लचीली फसल है। समय की मांग है कि हम यह समझें कि इसकी उत्पादकता बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है। अनुसंधान एवं विकास, फसलों की अ'छी देखभाल और एक मजबूत आपूर्ति शृंखला भी जरूरी है। वैश्विक स्तर पर, मोटे अनाज की पैदावार मुख्य रूप से एशियाई क्षेत्र में होती है। भारत, नाइजीरिया और चीन दुनिया के सबसे बड़े मोटा अनाज उत्पादक देश हैं। दुनिया की लगभग 55 फीसदी मिलेट्स की पैदावार इन देशों में होती है। कई वर्षों तक भारत मोटे अनाज का एक प्रमुख उत्पादक देश था। हमारे पूर्वज मौजूदा पीढ़ी की तुलना में इसके लाभों से 'यादा अवगत थे। मोटे अनाज में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले कई गुण हैं, विशेषकर यह उ'च फाइबर से युक्त है। मोटा अनाज सीलिएक रोगियों के लिए गेहूं या ग्लूटेन युक्त अनाज का विकल्प हो सकता है।

मोटे अनाज को आहार में नियमित इस्तेमाल करने के अत्यधिक लाभ हैं। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने, खनिज, फाइबर से युक्त होने और एंटीऑक्सीडेंट के कारण यह मोटापा, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करता है। यह अनाज अत्यधिक पौष्टिक होता है और अपने उ'च पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। इन तत्वों में प्रोटीन, आवश्यक फैटी एसिड, आहार फाइबर, विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम आदि शामिल होते हैं। ये पोषण संबंधी सुरक्षा तो प्रदान करते ही हैं, विशेषकर ब'चों और महिलाओं में पोषण संबंधी कमी को भी दूर कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 75वें सत्र में 202& को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया था। इस कदम से मोटे अनाज का वैश्विक उत्पादन बढ़ाने, प्रसंस्करण और फसल चक्र को बेहतर बनाने और खाद्य टोकरी के प्रमुख घटक के रूप में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के प्रयास हुए हैं। ये प्रयास आगे भी जारी रखने चाहिए।