
नीट के रिजल्ट का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों और उनके घरवालों के लिए 4 जून की रात अफरातफरी की वजह बनकर आई। करीब सोलह सौ बच्चों की ऊंची रैंकिंग आई। बाद में जब यह पता चला कि शत-प्रतिशत अंक 67 बच्चों के आए हैं, तो शुरू में लोग चकित हुए। बाद में उन्हें इस परीक्षा में धांधली की बू आने लगी। अगर नतीजे तय तारीख से दस दिन पहले आनन-फानन में नहीं लाए जाते, नतीजे प्रकाशित करने के लिए चुनाव नतीजों का दिन नहीं चुना जाता तो शायद 67 बच्चों के शत-प्रतिशत नंबर आने को प्रतिभा का विस्फोट माना जाता। जैसे-जैसे सूचनाएं बाहर आने लगीं परीक्षा के नतीजों को लेकर सवाल भी उठने लगे।
सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की स्थापना की थी। संसद के कानून से बनी इस स्वायत्त संस्था के जिम्मे राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के संस्थानों मसलन इंजीनियरिंग कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए दाखिला परीक्षा आयोजित करना और उनके नतीजे देना है। इस संस्था को जिम्मेदारी दी गई कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के लिहाज से परीक्षाएं आयोजित करेगी। लेकिन नीट परीक्षा के नतीजों पर उठे सवालों ने इस संस्था और उसके कार्यों को संदेह के दायरे में ला दिया है। विवाद होने के बाद कुछ बच्चों और उनके अभिभावकों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके नीट की परीक्षा फिर से कराने और दाखिले के लिए काउंसलिंग कराने पर रोक लगाने की मांग की।
सबसे बड़ी अदालत ने इन मांगों को स्वीकार तो नहीं किया, अलबत्ता टिप्पणी करते हुए एनटीए से जवाब मांग लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में माना है कि परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई है। इस संस्था के प्रमुख प्रदीप जोशी देश की सबसे संवेदनशील और सर्वोच्च परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें नियुक्त करते वक्त यही सोचा गया होगा कि संघ लोकसेवा आयोग जैसी पवित्रता वे एनटीए में भी बनाए रखेंगे, लेकिन नीट के नतीजों के बाद पैदा हुए विवाद से ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। नीट के नतीजों पर सबसे ज्यादा सवाल विद्यार्थियों को मिले ग्रेस अंक पर है। साथ ही नीट टॉपरों में शामिल आठ छात्रों का एक ही सीरीज का होना संदेह की वजह बना है। इनमें पहली रैंक पाए इन छात्रों में से छह हरियाणा के बहादुरगढ़ के परीक्षा केंद्र के हैं।
एक नामी कोचिंग के संस्थापक ने तो नीट परीक्षा की तमाम गड़बडिय़ों को लेकर बाकायदा बयान दिया है। उनका कहना है कि जिन 1573 छात्रों को एनटीए ने ग्रेस अंक दिए हंै, उसके लिए एनटीए ने उचित जांच-पड़ताल नहीं की। फिर शत-प्रतिशत अंक छह छात्रों को क्यों दिए गए। दरअसल टॉपरों में शामिल आठ में छह को ग्रेस अंक दिए गए हैं। सवाल उन पर ज्यादा है। ये वही छात्र हैं, जिन्होंने बहादुरगढ़ के केंद्र में परीक्षा दी थी। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि एनटीए ने उन छात्रों को ग्रेस अंक देने की व्यवस्था की थी, जिनका वक्त परीक्षा केंद्र की वजह से खराब हुआ। ऐसी शिकायतेंं आई थीं कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर पेपर बांटने में देरी की गई। 67 टॉपरों में से छह एक ही केंद्र बहादुरगढ़ के हैं, जिन्हें अनुकंपा अंक दिए गए हैं। इसकी वजह से भी मामला तूल पकड़ा और मामला अदालत तक गया।
नीट की परीक्षा पांच मई को हुई थी। इसके लिए ऑनलाइन नौ फरवरी से नौ मार्च तक आवेदन किया जाना था। आखिरी के दो दिनों तक आवेदन वाली वेबसाइट क्रैश हो गई थी। तब अभिभावकों की मांग पर एनटीए ने फॉर्म भरने की आखिरी तारीख दो दिनों के लिए बढ़ाई। आठ टॉपरों को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इनकी यह भी जांच की जाए कि इन्होंने बढ़ाए गए दो दिनों में अपना फॉर्म जमा तो नहीं किया। इस परीक्षा के लिए 20 लाख 38 हजार छात्रों ने आवेदन किया और परीक्षा दी। इसमें से 11 लाख 45 हजार छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। उत्तीर्ण छात्रों की संख्या को लेकर भी विवाद हो रहा है।
बहरहाल आरोपों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को दिए गए ग्रेस अंक समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है। वैसे यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि ग्रेस अंक की व्यवस्था तब की गई, जब नीट परीक्षा में वक्त खत्म होने की शिकायतें आईं। हालांकि एनटीए का कहना है कि यह व्यवस्था उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित सामान्यीकरण सूत्र पर आधारित है। परिणाम से असंतुष्ट विद्यार्थी ग्रेस अंक और अंकों में असामान्य बढ़त पर सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से नीट परीक्षा की पवित्रता पर सवाल उठे हैं। इतना ही नहीं, नीट के सामान्यीकरण के सूत्र पर भी सवाल उठ रहे है। असंतोष दूर करने के लिए सभी संदेहों का निवारण किया जाना चाहिए।
— उमेश चतुर्वेदी
Published on:
13 Jun 2024 04:52 pm
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