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संपादकीयः अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर है नवरात्र

चैत्र नवरात्र हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर प्रदान करता है। नवरात्र का पर्व इस नवसंवत्सर को आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, जो हमें जीवन के अलग-अलग मूल्यों शक्ति, ज्ञान, धैर्य और करुणा का पाठ पढ़ाते हैं।

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जयपुर

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ANUJ SHARMA

Mar 19, 2026

आज चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से आरंभ होने वाले नवरात्र केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और कालगणना का महत्वपूर्ण आधार है। इसी दिन से हमारा नया वर्ष (नव संवत्सर) भी आरंभ होता है। भारतीय कालगणना प्रकृति के चक्रों के साथ जुड़ी हुई है। चैत्र मास में जब प्रकृति नवजीवन का संचार करती है, पेड़ों पर नई कोंपलें फूटती हैं, खेतों में फसलें लहलहाती है और मौसम में परिवर्तन होता है, उसी समय भारतीय नया वर्ष आरंभ होता है। यह संकेत है कि प्रकृति की तरह जीवन में भी नवता, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होना चाहिए।

भारतीय नव वर्ष बताता है कि हमारी परंपराएं केवल आस्था पर नहीं, बल्कि गहरे वैज्ञानिक और प्राकृतिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। लेकिन विडंबना है कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी इस समृद्ध परंपरा से दूर होते जा रहे हैं और पश्चिमी कैलेंडर को ही अपना वास्तविक नववर्ष मानने लगे हैं। ऐसे में चैत्र नवरात्र हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर प्रदान करता है। नवरात्र का पर्व इस नवसंवत्सर को आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, जो हमें जीवन के अलग-अलग मूल्यों शक्ति, ज्ञान, धैर्य और करुणा का पाठ पढ़ाते हैं। यह साधना मंदिरों या घरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण की एक प्रक्रिया है।

उपवास, ध्यान और संयम के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को आत्मसात करता है। वहीं मानसिक रूप से यह पर्व हमें अनुशासन और आत्मसंयम का अभ्यास कराता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के लिए आवश्यक है। यह पर्व शक्ति की उपासना के साथ हमें यह सोचने के लिए भी प्रेरित करता है कि क्या हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? क्या हमारे लक्ष्य केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित हैं या हम मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं? नव संवत्सर के साथ यह आत्ममंथन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह नए वर्ष के लिए नई दिशा और संकल्प तय करने का समय है।

हालांकि, यह भी सच है कि समय के साथ इन पर्वों का स्वरूप बदलता जा रहा है। आडंबर और दिखावे के बीच इनके मूल उद्देश्य कहीं धुंधले पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरत है कि हम इन परंपराओं को केवल रस्मों तक सीमित न रखें, बल्कि इनके पीछे छिपे वैज्ञानिक, सांस्कृतिक संदेश को समझें और उसे अपने जीवन में उतारें। भारतीय पर्वों को धूमधाम से मनाएं। चैत्र नवरात्र और नव संवत्सर हमें अपने जीवन के लक्ष्यों पर पुनर्विचार और पुराने अनुभवों से सीख लेकर नए लक्ष्य निर्धारित करने का अवसर भी देता है। नव वर्ष की शुरुआत में हम इन नौ दिनों को आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीते हैं, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन समृद्ध होगा, बल्कि समाज में भी एक नई चेतना का संचार होगा।