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Patrika Opinion: रक्त के काले कारोबार को रोकने की जरूरत

हाल ही में राजस्थान में चार ऐसे ब्लड बैंकों पर कार्रवाई की गई है, जो खून के अवैध कारोबार के खुलासे के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर थे। इनमें अनियमितताएं पाए जाने के बाद तीन ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, जबकि एक का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।

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Patrika Desk

Feb 22, 2023

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

रक्तदान को महादान माना जाता है, लेकिन कुछ स्वार्थी लोग ब्लड बैंकों की मिलीभगत से खून का काला कारोबार कर मानवता को शर्मसार करने में लगे हुए हैं। हाल ही में राजस्थान में चार ऐसे ब्लड बैंकों पर कार्रवाई की गई है, जो खून के अवैध कारोबार के खुलासे के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर थे। इनमें अनियमितताएं पाए जाने के बाद तीन ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, जबकि एक का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। दरअसल, पिछले साल जुलाई में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया था, जो मिलावटी खून का कारोबार करता था। पता चला कि मिलावटखोर सलाइन वॉटर मिलाकर खून बेच रहे थे। इन लोगों ने ब्लड बैंक संचालकों से मिलकर रक्तदान शिविरों से जुटाए खून का अवैध सौदा कर खूब कमाई की। इसमें राजस्थान में लगे शिविरों से खून जुटाकर उसका यूपी में सौदा किया जाता था। इसके बाद दोनों राज्यों में कई ब्लड बैंक जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए थे।

इंसानी खून का सौदा कर कमाई का यह अमानवीय कृत्य सिर्फ राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। बिहार समेत अन्य राज्यों में भी ऐसी शिकायतें आती रही हैं। ब्लड बैंकों पर निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रक संगठन की होती है, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते ही रहते हैं। आम तौर पर देखा गया है कि कोई बड़ा मामला सामने आने के बाद ही कार्रवाई की जाती है। राज्यों से ऐसी रिपोर्टें बहुत कम ही मिलती हंै कि ब्लड बैंकों का नियमित निरीक्षण कर उनमें मानकों की जांच की गई हो।

कई राज्यों में यह भी सामने आया है कि कुछ प्राइवेट ब्लड बैंक रक्तदाता को नकद राशि या गिफ्ट तक दे रहे हैं। सवाल यह है कि जब आम व्यक्ति स्वैच्छिक रूप से रक्तदान कर रहा है, तो ब्लड बैंकों को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। रक्तदान पर नकदी और गिफ्ट देने का यह ट्रेंड भी कहीं-कहीं ब्लड बैंकों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। खास तौर पर लाइसेंस देते समय ब्लड बैंक की मंशा, उद्देेश्य व उसकी पृष्ठभूमि को बारीकी से जांचने की जरूरत है। साथ ही पूरे देश में ब्लड बैंकों की निगरानी के लिए ऐसा पुख्ता केंद्रीयकृत सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है जिससे प्रत्येक रक्तदाता को यह पता चल सके कि उसके दान किए गए खून का सही इस्तेमाल हो रहा है। इससे न केवल रक्तदाता का रक्तदान के प्रति भरोसा बढ़ेगा, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी आएगी।