
'स्टील फ्रेम' की नकारात्मक छवि
'स्टील फ्रेम' की नकारात्मक छवि से निकलना होगा
श्रीनिवास कटिकिथला
निदेशक, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी
राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस हर वर्ष 21 अप्रेल को मनाया जाता है। राष्ट्रीय सिविल सेवा के विचार का यह एक उत्सव है। सरदार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नव गठित भारतीय प्रशासनिक सेवा की शुरुआत की थी। यह पूरी तरह से भारतीय अधिकारी के साथ और पूरी तरह से भारतीय नियंत्रण के अधीन ... अतीत की परंपराओं और कुप्रभावों के बिना, राष्ट्रीय सेवा की अपनी वास्तविक भूमिका को अपनाने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने एक मूल मंत्र दिया, जो प्रत्येक सिविल सेवा अधिकारी को प्रेरित कर सकता है, 'हमें भारत में प्रत्येक सिविल सेवा अधिकारी से सर्वश्रेष्ठ की अपेक्षा करने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी जिम्मेदारी के पद पर क्यों न हो। आप इस पर गंभीरता से विचार करें कि समग्र रूप से भारत के कल्याण में कैसे योगदान दिया जाए।' इसलिए, सरदार पटेल के वाक्यांश 'स्टील फ्रेमÓ को एक कठोर, प्रतिबंधात्मक और नियम-बद्ध औपनिवेशिक नौकरशाही के नकारात्मक अर्थ से जोडऩा हास्यास्पद है।
वर्ष 1921 में हाउस ऑफ कॉमन्स की डिबेट में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड लॉयड जॉर्ज ने इंपीरियल सिविल सर्विस (आइसीएस) के वर्णन के दौरान 'स्टील फ्रेम' को सिविल सेवा की लोकप्रिय संस्कृति और स्व-परिकल्पना दोनों को परिभाषित करने के लिए प्रयुक्त किया गया था। इसलिए, राष्ट्रीय लोकाचार में निहित एक सिविल सेवा को तैयार करने की शुरुआती सरकारों की चिंताएं, लक्ष्य से विचलित हो गईं, क्योंकि वह देश-विभाजन का अशांत दौर था। यह काम अधूरा रह गया।
सिविल सेवा के लिए एक भारतीय लोकाचार को परिभाषित करने का कार्य भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन के साथ शुरू हुआ, जहां उन्होंने भारत को 'अमृत महोत्सव' से 'अमृत काल' की ओर ले जाने के लिए, देश की दृष्टि और 'पंच प्रण' यानी पांच संकल्प - की व्याख्या की। दूसरा संकल्प अर्थात औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त करने के लिए स्व-परिकल्पना के पुनरीक्षण और सिविल सेवाओं से जुड़ी औपनिवेशिक कार्य-संस्कृति को हटाने की जरूरत है। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) ने सिविल सेवा को पीपल वृक्ष के रूप में प्रस्तुत किया। यह भावना वृक्ष, 'सेवा और सहानुभूति' से जुड़ा है। नागरिकों के कल्याण में स्वर्ग-तुल्य आराम की तलाश के लिए प्रेरक अकादमी, भावना वृक्ष को एक प्रतीक के रूप में परिकल्पना करती है, जो निस्वार्थ सेवा और कत्र्तव्य के प्रति समर्पण के कालातीत गुणों का प्रतिनिधित्व करता है। यह अकादमी उच्चतर सिविल सेवाओं के अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए समर्पित, भारत का अग्रणी संस्थान है। इसके मुख्य दायित्व हैं- अखिल भारतीय सेवाओं तथा केंद्रीय सेवाओं (समूह 'क') के सदस्यों को एक संयुक्त आधारिक पाठ्यक्रम के जरिए प्रवेशकालीन प्रशिक्षण प्रदान करना। अमृत काल के लिए एक आदर्श सिविल सेवा अधिकारी की विशेषताओं और अवधारणा को पहली बार 31 अक्टूबर 2019 को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित किया गया था। ये हैं - सक्रिय और विनम्र, पेशेवर और प्रगतिशील, ऊर्जावान और सक्षम, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम, रचनात्मक और सकारात्मक तथा कल्पनाशील और अभिनव। भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा के विचार में समग्रता है। एक पूरी सरकार और मिलकर काम करने का दृष्टिकोण, भविष्य का अंदाजा लगाना, कार्य-प्रणाली में सहयोगी, संवाद व कार्यों के प्रति भागीदारी की भावना तथा स्वभाव से अभिनव। दूर-दराज के क्षेत्रों में लोगों की सेवा करने वाले 'भावना वृक्ष' की यही प्रकृति है।
औपनिवेशिक मानसिकता समाप्त करने वाला, भारतीय मूल्यों के प्रति गर्व की भावना को साझा करने वाला और राष्ट्र-प्रथम दृष्टिकोण के साथ कत्र्तव्य-बद्ध सिविल अधिकारियों का समूह 'मसूरी वाला कर्मयोगीÓ के रूप में बाहर निकलता है। औपनिवेशिक 'स्टील फ्रेम' की नकारात्मक अवधारणा को दरकिनार कर पटेल के आह्वान को साकार करना होगा। उन्होंने कहा था, '...अब, आप अपने ही लोगों की सेवा कर रहे हैं। तो अब, आप अपने दिल, दिमाग और आत्मा के साथ सेवा कर सकते हैं... आप अपने लोगों की सेवा करके वास्तव में भारतीय होंगे।'
Published on:
21 Apr 2023 09:59 pm
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