
कुपोषण से लडऩे में मददगार बन रहा पोषण ट्रैकर एप,कुपोषण से लडऩे में मददगार बन रहा पोषण ट्रैकर एप,कुपोषण से लडऩे में मददगार बन रहा पोषण ट्रैकर एप
इंदेवर पांडेय
सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार
कुपोषण विशेषकर कमजोर वर्ग के बच्चों और महिलाओं में एक बड़ी चुनौती रहा है। वर्ष 1992-1993 में प्रथम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) में यह पाया गया कि भारत भी बाल स्वास्थ्य संकेतकों के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 'पूरक पोषण कार्यक्रम' सहित एकीकृत बाल विकास योजना (आइसीडीएस) जैसे प्रणालीगत उपायों और कार्यक्रमों के जरिए कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए प्रयासरत है। इसके तहत सबसे कमजोर वर्गों, यानी 6 साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को पूरक भोजन/फोर्टिफाइड राशन उपलब्ध कराया जाता है।
केंद्र सरकार ने सेवा मुहैया कराने में बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में प्रौद्योगिकी की क्षमता पर विशेष जोर दिया है। इसी भावना के अनुरूप 'पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन' को वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया। पोषण ट्रैकर एप को देश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों से आइसीडीएस के तहत कुपोषण और सेवा उपलब्धता से संबंधित डेटा/रेकॉर्ड का डिजिटलीकरण करने की दृष्टि से लॉन्च किया गया था, जिससे निगरानी और नीतियां बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। पोषण अभियान के तहत पहली बार आंगनबाड़ी केन्द्रों और कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन से लैस किया गया। बच्चों में उम्र के हिसाब से छोटा कद होने, कद के अनुसार बच्चे का वजन न होने, बेहद कम वजन होने की समस्याओं की पहचान तेजी से करने और अंतिम लाभार्थी को पोषण सेवा मुहैया कराने की निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर से जुड़ी प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।
9.8 करोड़ से भी ज्यादा लाभार्थियों को कवर करने वाले 13.9 लाख से अधिक कार्यरत आंगनबाड़ी केंद्रों से दैनिक डेटा एकत्र करते हुए पोषण ट्रैकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सेवाएं मुहैया कराने और बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पूर्ण लाभार्थी प्रबंधन सहित निर्धारित संकेतकों पर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की वास्तविक समय पर निगरानी और ट्रैकिंग को संभव करता है। पोषण ट्रैकर पर्यवेक्षकों और कार्यक्रम अधिकारियों को प्रगति की निगरानी करने और सेवा मुहैया कराने की आपूर्ति शृंखला में निहित कमी को पूरा करने के लिए वेब-आधारित डैशबोर्ड तक पहुंचने में भी मदद करता है। वास्तविक समय पर इस निगरानी के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को ट्रैक किया जाता है, जिससे इस कार्यक्रम की प्रगति का समग्र अवलोकन हो जाता है। यह हिंदी और अंग्रेजी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
अंतिम छोर के लाभार्थी को पोषण सेवा मुहैया कराने की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय निरंतर प्रयासरत रहा है। इसे सुनिश्चित करने के लिए पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत लाभार्थियों को 'आधार' से जोड़ा जाता है। यदि किसी बच्चे का 'आधार' उपलब्ध नहीं है, तो इसे मां के 'आधार' से जोडऩे की सुविधा का प्रावधान है। लाभार्थियों को 'आधारÓ से जोडऩे से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि अंतिम लाभार्थी को पोषण सेवा मुहैया कराने की निगरानी एवं ट्रैक करने की अच्छी व्यवस्था है और संबंधित सेवा किसी दूसरे को मुहैया करा देना यानी कोई लीकेज या फर्जी प्रविष्टि संभव नहीं है। अब तक लगभग 82 प्रतिशत लाभार्थियों को 'आधार' से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा, पोषण ट्रैकर ने माइग्रेशन मॉड्यूल को सक्षम करके सही मायनों में आंगनबाड़ी सेवाओं के सार्वभौमीकरण को संभव कर दिया है। ट्रैकर में निहित माइग्रेशन मॉड्यूल से लाभार्थी के रेकॉर्ड को राज्य के भीतर या एक राज्य से दूसरे राज्य में एक आंगनबाड़ी केंद्र से दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र में निर्बाध रूप से स्थानांतरित करना संभव हो गया है। ऐसे में लाभार्थी देश भर में कहीं से भी संबंधित पोषण सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
निर्णय लेने और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोग्राम डिजाइन में बदलाव करने के लिए डेटा एवं सबूत और फीडबैक लूप अत्यंत आवश्यक हैं। पोषण ट्रैकर न केवल डेटा ट्रैकिंग व्यवस्था है, बल्कि इससे पोषण कार्यक्रम और इसकी सेवा मुहैया कराने की दक्षता और प्रभावशीलता की वास्तविक समय पर निगरानी करना संभव हो जाता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आरसीएच पोर्टल जैसे अन्य प्रोग्रामेटिक टूल के साथ पोषण ट्रैकर का एकीकरण करने से लाभार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों की समग्र तस्वीर सामने आ पाएगी।
Published on:
30 Sept 2022 06:59 pm
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