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Opinion : डिपोर्ट प्रक्रिया में मानवीय पहलू का भी रखें ध्यान

अमरीका से अवैध प्रवासी भारतीयों के निर्वासन के मुद्दे पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आश्वस्त किया है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निर्वासित होकर आने वाले भारतीयों के साथ किसी तरह का दुव्र्यवहार नहीं हो। अमरीकी एयरफोर्स के विमान से डिपोर्ट किए गए भारतीयों को जिस तरह से लाने की जानकारी सामने […]

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अमरीका से अवैध प्रवासी भारतीयों के निर्वासन के मुद्दे पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आश्वस्त किया है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निर्वासित होकर आने वाले भारतीयों के साथ किसी तरह का दुव्र्यवहार नहीं हो। अमरीकी एयरफोर्स के विमान से डिपोर्ट किए गए भारतीयों को जिस तरह से लाने की जानकारी सामने आ रही है, उसे देखते हुए विदेश मंत्री का यह बयान निश्चित ही अवैध रूप से रह रहे उन प्रवासी भारतीयों के लिए भी राहत की खबर है, जिन्हें आने वाले दिनों में भारत भेजा जाना है। अवैध प्रवासियों की समस्या अमरीका ही नहीं, भारत समेत कई दूसरे देशों की भी है। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी भी चाहिए, लेकिन अमानवीय व्यवहार तो किसी भी सूरत में उचित नहीं कहा जा सकता। विपक्ष ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में अमरीका के मिलिट्री प्लेन से अमानवीय तरीके से हथकड़ी लगाकर डिपोर्ट किए गए लोगों को भारत भेजने पर जमकर हंगामा किया। इसके बाद विदेश मंत्री ने जवाब में डिपोर्ट किए जाने वाले लोगों के लिए कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया और साथ ही आश्वस्त भी किया कि अमरीकी सरकार से लगातार बातचीत जारी है ताकि ऐसे भारतीयों के साथ दुव्र्यवहार नहीं हो।
भारत-अमरीका के बीच दोस्ताना संबंधों की चर्चा वैश्विक बिरादरी में रहती आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी माह अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से प्रस्तावित मुलाकात में दोनों देशों के रिश्तों में और गर्मजोशी की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में डिपोर्ट किए जाने वाले भारतीयों से दुव्र्यवहार की खबरों से चिंता स्वाभाविक है। यह बात भी सही है कि किसी भी देश को अपने यहां रह रहे दूसरे देश के अवैध प्रवासी को अपने कानून के मुताबिक डिपोर्ट करने का हक है। यदि कोई अपराधी है तो उसे संबंधित देश के कानून के अनुसार दंड भी मिलना चाहिए। लेकिन अपराधी को सजा देते वक्त मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखना उतना ही जरूरी है। लेकिन अमरीका अपने यहां अवैध प्रवासियों के निर्वासन का जो तरीका अपना रहा है, उसकी दुनियाभर में आलोचना भी हो रही है। शहरों में अवैध प्रवासियों पर छापे मारे जा रहे हैं और पकड़े गए लोगों को सेना के विमानों में भरकर उनके देशों को भेजा जा रहा है। अमरीका जैसा देश जो खुद को मानवाधिकारों का बड़ा पक्षधर बताता रहता है, उसे तो इस दिशा में अधिक ध्यान रखना चाहिए। भारत सरकार पहले ही अमरीका को निर्वासन प्रक्रिया में सहयोग के लिए आश्वस्त कर चुकी है। दोनों देशों के दूतावासों को माध्यम बनाकर डिपोर्ट की इस प्रक्रिया को बाधा रहित बनाया जाना चाहिए।