
भारतीय खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने छह आतंकियों को गिरफ्तार कर आतंकी साजिश विफल करने का दावा किया है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें दो आतंकियों ने पाकिस्तान में उसी जगह प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने मुंबई के हमले के लिए अजमल कसाब को तैयार किया था। साफ है कि पाकिस्तान, भारत में फिर से आतंकी हमले के लिए जमीन तैयार कर रहा है।
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के हौसले बुलंद हैं। वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को खत्म करने से भी बौखलाया हुआ है और मौका मिलते ही भारत में अस्थिरता पैदा करने की फिराक में है। भारतीय खुफिया एजेंसियों को गिरफ्तार आतंकियों से मिली सूचनाएं वाकई गंभीर हैं। यह भी पता चला है कि पाकिस्तानी सेना बांग्लादेश और भारत से भी युवकों की भर्ती कर उनको आतंकी ट्रेनिंग दे रही है।
पाकिस्तान का आतंकियों से जुड़ाव छिपा नहीं है। इसके बावजूद अमरीका ने तालिबान के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान पर भरोसा किया। इसका हश्र यह हुआ कि अमरीका को बीस साल बाद तालिबान को ही अफगानिस्तान सौंप कर जाना पड़ा। अब अमरीका खुद कह रहा है कि तालिबान के साथ पाकिस्तान का जुड़ाव एक चाल है। वह पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा। यह वाकई हैरत की बात है कि अमरीका जैसे देश को पाकिस्तान की चाल को समझने बीस वर्ष लग गए।
यदि समय रहते अमरीका आतंकियों को शह और प्रशिक्षण देने के मामले में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता, तो आतंकियों की कमर टूट गई होती। अमरीका और दूसरे बड़े देशों ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में भारत की कभी मदद नहीं की। हां, मानवाधिकारों के नाम पर आतंकियों का बचाव जरूर किया। इसका खमियाजा पूरे विश्व को भुगतना पड़ा।
यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान आतंकियों को समर्थन और प्रशिक्षण दे रहा है। अमरीका तक यह बात मान रहा है कि पाकिस्तान तालिबान और खासकर हक्कानी नेटवर्क को शह दे रहा है, तो विश्व समुदाय को पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाना होगा। भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी वारदातों में पाक प्रशिक्षित आतंकियों के लिप्त होने के मामले लगातार आते रहे हैं। इसलिए भारत को सतर्क रहना होगा। साथ ही वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करना होगा, ताकि उसका आतंकी चेहरा साफ-साफ नजर आए।
Published on:
16 Sept 2021 07:38 am
