
Jaipur Heritage
राजस्थान और खास तौर से जयपुर (Jaipur) के नागरिकों के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है कि जयपुर शहर (परकोटे के भीतर) को विश्व धरोहर (heritage) सूची में शामिल कर लिया गया है। इस सफलता ने विश्वभर में जयपुर का परचम फिर लहरा दिया है। इससे पहले जंतर-मंतर और आमेर का किला यूनेस्को (UNESCO) की वल्र्ड हैरिटेज लिस्ट (World Heritage List) में स्थान पा चुके हैं। अहमदाबाद के बाद जयपुर भारत का दूसरा जीवंत शहर बन गया है जिसे हैरिटेज सिटी के रूप में चुने जाने का गौरव हासिल हुआ है।
इस उपलब्धि के साथ अब राजस्थान सरकार की ही नहीं, जयपुर शहर के हर नागरिक की जिम्मेदारी बढ़ गई है। हमें इस गौरव को न सिर्फ बनाए रखना है, बल्कि विश्व पर्यटन मानचित्र में जयपुर को शीर्ष स्थान पर पहुंचाना है। विश्व हैरिटेज सूची में शामिल होने के साथ ही अब दुनिया भर के पर्यटकों की जयपुर में आमद बढ़ जाएगी। ऐसे में हमें एक तरफ शहर की कला-संस्कृति, वास्तु, बाजारों और जलाशयों को संरक्षित रखना होगा, वहीं पर्यटकों की आवभगत और सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी भी करनी होगी। क्या हम और हमारा प्रशासन इसके लिए तैयार है?
परकोटे के भीतर के जयपुर शहर को इसके परंपरागत वास्तुशिल्प और नगर नियोजन के आधार पर भले ही विश्व धरोहर मान लिया गया है, लेकिन हम जानते हैं कि शहर की विरासत को जितना नुकसान पिछले डेढ़-दो दशकों में हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ होगा। नगर निगम (Municipal Corporation) के ठेकेदारों ने शहर के रास्तों-गलियों से पत्थर के चौके उखाड़ कर बेच डाले और डामर बिछा दिया। बिना यह जाने कि दुनिया के कई हैरिटेज शहरों में पत्थर के चौकों से बनाई गई सडक़ें आज तक संरक्षित कर के रखी गई हैं। जयपुर की बड़ी और छोटी चौपड़ों का पारम्परिक स्वरूप मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ गया। टाउन हॉल (पुराना विधानसभा भवन) खंडहर में बदल गया। बरामदों पर फिर अतिक्रमण हो गए। हवेलियों में मॉल खुल गए। दुकानों के नीचे तहखाने बन गए। वाहनों की इतनी भीड़ कि पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बची। जलमहल, मावठा, सागर ही नहीं शहर में मौजूद कई छोटे-बड़े जलाशय अतिक्रमण या उपेक्षा के शिकार हो गए। पर्यटकों की मदद के नाम पर लपके पर्यटकों को ठग-विद्या का शिकार बनाने लग गए। जगह-जगह कचरे के ढेर और गंदगी के अम्बार पर्यटकों को मुहं चिढ़ाते नजर आते हैं।
शहर की ऐसी दुर्गति होने का मुख्य कारण यह रहा कि पुराने हैरिटेज शहर और दिनों-दिन विस्तार पाते नए जयपुर की व्यवस्थाएं एक ही नगर निगम करता रहा है। नए शहर की रोजमर्रा की समस्याओं से जूझने वाले मौजूदा नगर निगम से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह एक साथ 'दो शहरों' का काम संभाले।
न उसके पास पर्याप्त बजट है, न कर्मचारी, न विजऩ और न समय। नए और पुराने शहर की आवश्यकताएं और प्राथमिकताएं एकदम अलग हैं। इसलिए अब यह जरूरी हो गया है कि हैरिटेज सिटी के लिए तुरंत अलग नगरीय निकाय का गठन किया जाए। हैरिटेज सिटी के लिए नए और अलग नगरीय निकाय की घोषणा राज्य सरकार को आने वाले बजट में कर देनी चाहिए। इस निकाय में ऐसे अफसरों की नियुक्ति होनी चाहिए जिनके मन में विरासत के लिए दर्द हो। इस निकाय के सदस्यों को राजनीति से दूर रखना होगा। बेहतर तो यह होगा कि उनका चयन शहर के प्रति उनके लगाव और उनकी विशेषज्ञता के आधार पर किया जाए। शहर के नागरिकों को भी पर्यटकों की आवभगत यह मान कर करनी होगी कि वे हमारे ऐसे मेहमान हैं जो विश्वभर में जयपुर शहर की ब्रांडिंग करेंगे और नगर के लिए समृद्धि के रास्ते खोलेंगे।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पुराने शहर का पारंपरिक वैभव बरकरार रखने के लिए बरामदों पर से अतिक्रमण हटाने का महाअभियान अपने पिछले कार्यकाल के दौरान चला चुके हैं। उन्हें एक बार फिर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा। पृथक नगर निकाय हैरिटेज सिटी की पहली आवश्यकता है। लीक से हट कर उठाए गए ऐसे ही कदम विश्व पर्यटन में राजस्थान की धाक जमा पाएंगे।
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