15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दुर्लभ धातु चीन का अगला आर्थिक हथियार

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 97 प्रतिशत है। चीन ने इसके खनन-शोधन के बल पर आपूर्ति शृंखला के हर स्तर पर आक्रामक तरीके से एकाधिकार किया है। जिस तरह रूस ने यूरोप और यूक्रेन में प्राकृतिक गैस के जरिए राजनीतिक फायदा उठाया है, चीन भी आरईई को एक आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की इच्छा परिलक्षित कर चुका है।

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Patrika Desk

Sep 21, 2022

rare_earths.png

भू -वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की अंदरूनी सतह में पाए जाने वाले ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ (आरईई) यानी दुर्लभ खनिज तत्त्व अपने नाम के बावजूद धरती पर असुलभ तो नहीं हैं पर बहुमूल्य जरूर हैं। खनन में आने वाली दिक्कतों व पहुंच की कमी के कारण इनका सीमित दोहन हो ही पाता है। प्राकृतिक रूप से अन्य खनिजों में घुले-मिले होने के कारण प्रसंस्करण भी आसान नहीं होता।
‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ 17 दुर्लभ धातु तत्त्वों का समूह है। इनका इस्तेमाल सभी उन्नत तकनीकों वाले निर्माण जैसे स्मार्टफोन, लड़ाकू विमान और उनके महत्त्वपूर्ण घटकों समेत लगभग सभी उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। इतना ही नहीं, ये अधिकांश स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की जरूरत हैं जिनकी कार्यप्रणाली इस एक दशक में ऑनलाइन हो जाने की संभावना है। आरईई को सबसे पहले अमरीका में खोजा गया और वहीं उपयोग में लाया गया। हालांकि, बाद में इनका उत्पादन धीरे-धीरे चीन में स्थानांतरित हो गया जहां श्रम लागत कम थी, पर्यावरण चिंताएं न के बराबर थीं। आरईई के वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 97 प्रतिशत है। चीन ने इसके खनन-शोधन के बल पर आपूर्ति शृंखला के हर स्तर पर आक्रामक तरीके से एकाधिकार किया है। जिस तरह रूस ने यूरोप और यूक्रेन में प्राकृतिक गैस के जरिए राजनीतिक फायदा उठाया है, चीन भी आरईई को एक आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की इच्छा परिलक्षित कर चुका है।