
बजट चाहे केन्द्र का हो या फिर राज्यों का, जब भी पेश होता है चर्चा का विषय बनता रहा है। राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक तंत्र में और शिक्षाविदों से लेकर विधिवेत्ताओं के बीच ही नहीं, बल्कि घर-परिवारों तक में बजट प्रावधान चर्चा के विषय होते आए हैं। लेकिन, हमारे अपने शहरों की सरकारें यानी स्थानीय निकाय जो बजट बनाते हैं उन पर शायद ही किसी का ध्यान जाता हो। हां, स्थानीय मीडिया में बजट प्रावधानों का थोड़ा- बहुत कवरेज जरूर मिल जाता है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि शहरी निकायों में धन कहां और कैसे खर्च हो तथा निकायों की आय कहां से आए, इस बारे में चर्चा इतनी हो ही नहीं पाती।
केन्द्र व राज्यों के बजट से ज्यादा नगर निकायों के बजट आम आदमी को प्रभावित करते हैं। जब हम विचार करते हैं कि संघ, राज्य और नगर निकाय के बजट में से कौनसा बजट हमें किस स्तर तक प्रभावित करता है, तो पता चलेगा कि केन्द्र व राज्य के बजट महज 30 प्रतिशत और नगर निकायों व अन्य स्थानीय एजेंसियों जैसे- जलापूर्ति बोर्ड, शहरी विकास प्राधिकरण आदि के बजट ७० फीसदी तक प्रभावित करते हैं।
Updated on:
29 Aug 2022 08:55 pm
Published on:
29 Aug 2022 04:38 pm
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