हमारे बड़े-बूढ़े भी
बहुत स्याणे थे। उन्होंने जिन्दगी के सभी रंगों को बड़ी शिद्दत से निहारा था। आदमी
की छोटी-छोटी हरकतों को देख उन्होंने जो लब्बोलुआब निकाला वह बहुत दिलचस्प है। एक
पुराना मुहावरा दिल के करीब है और कमोबेश उसे आजमाया भी है। बुजुर्गो की कही यह बात
कसौटी पर खरी उतरती दिखाई देती है। जरा मुहावरा मुलाइजा फरमाइए- पूत कपूत तो क्यूं
धन संजय, पूत सपूत तो क्यूं धन संचय? दोनों वाक्यों में सिर्फ एक शब्द का ही हेरफेर
है। एक में "क" है तो दूसरे में "स"। यह मुहावरा हमें चीन के जियांग्सू सूबे के एक
किसान ताओ की हरकत से सूझा।
ताओ ने अपनी वसीयत लिखी कि वह जब मरे तो उसके जीवन भर
की कमाई जो कि करीब इक्कीस लाख रूपए थी, उसी के साथ चिता में जला दी जाए। और ऎसा ही
हुआ भी। अब ताओ अपनी औलादों से क्यों खफा था, इसका अनुमान लगाना भी बीजगणित के कठिन
सवाल को हल करने से ज्यादा मुश्किल नहीं है। चीन की छोड़ो हमारे समाज में भी दस में
से सात बाप अपनी औलादों से नाखुश रहते हैं। बड़भागी वे बाप हैं जो अपने सुपुत्रों
से संतुष्ट हैं।
यहां हम पुत्रियों का जिक्र नहीं कर रहे हैं क्योंकि हमारे यहां ही
नहीं पूरे भारतीय उपमहा द्वीप में बेटियों को पराया धन माना गया है। बचपन से ही हम
कहना शुरू कर देते हैं कि अरे यह तो किसी और की अमानत है और गैर की अमानत बता कर
बेटी के मन में बालपन से ही एक गैरपन का अहसास दिलाते रहते हैं। लेकिन बेटा कैसा भी
हो अपना माना जाता है और उम्मीद की जाती है कि वह बुढ़ापे की लाठी बनेगा। एक मजेदार
बात बताएं।
आप जरा किसी रिश्वतखोर अफसर से सवाल करें कि हुजूर! सरकार तो आपको मोटी
तनखा दे रही थी। ऑलरेडी खूब सम्पत्ति थी। आप ऎश कर रहे थे। बावजूद इसके यह टुच्ची
हरकत आपने क्यों की? सौ फीसदी भ्रष्ट बाप यही कहेंगे कि यह घूस उसने अपने बेटे के
लिए ली थी। भैया अगर वह सपूत है तो फिर उसके लिए ऎसी हरकत करने की जरूरत क्या है?
अगर कपूत है, आवारा है, मवाली है तो चाहे उसके लिए कुबेर का खजाना छोड़ जाओ वह उसको
भी उड़ा देगा।
और सुनिए यह जो बात हम आपसे कर रहे हैं यह कोई नई पहेली नहीं है। तब
से चल रही है जब से आदमी ने परिवार बनाने शुरू किए हैं। बहरहाल अब खुद ही तय कीजिए
कि आपको औलादों के लिए क्या करना है। जहां तक उसके लालन-पालन का सवाल है तो भैया
जानवर भी अपनी औलादों को जतन से पालते हैं। बेचारा कौवा तो अपनी संतानों के साथ-साथ
धूर्त कोयल के बच्चों की भी परवरिश करता है। संतान तो लकड़बग्घे को भी प्यारी होती
है।
राही