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आत्म-दर्शन : करुणा और स्वास्थ्य

करुणा के कार्य हमारे दैनिक जीवन के अंग हैं। करुणा से मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

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दलाई लामा

दलाई लामा

दलाई लामा, बौद्ध धर्म

हम मनुष्य पृथ्वी पर हजारों वर्षों से हैं। यदि इस दौरान मनुष्य का चित्त मुख्य रूप से क्रोध तथा घृणा के वश में होता, तो हमारी कुल जनसंख्या कम हो जाती, परन्तु कई युद्धों के बावजूद, हम पाते हैं कि मनुष्य की जनसंख्या पहले से कहीं अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि संसार में प्रेम तथा करुणा प्रबल है। इसलिए अप्रिय घटनाएं समाचार होती हैं, करुणा के कार्य हमारे दैनिक जीवन के अंग हैं। करुणा से मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। निजी अनुभव के आधार पर मैं दृढ़ता से कह सकता हूं कि करुणा तथा अच्छे स्वास्थ्य का सीधा संबंध है। इसको लेकर कोई प्रश्न ही नहीं उठता कि क्रोध तथा बेचैनी के कारण हम बीमार भी हो जाते हैं।

मानसिक शांति केवल करुणापूर्ण प्रवृत्ति से आती है। सवाल यह है कि हम इसका विकास किस प्रकार से कर सकते हैं? स्पष्ट है कि केवल यह सोचना पर्याप्त नहीं है कि करुणा भाव कितना अच्छा है। हमें उसके विकास के लिए भी गंभीर प्रयास करने होंगे। अपने विचारों तथा आचरण में परिवर्तन लाना होगा। यदि कोई नकारात्मक आचरण करे, तो भी उसके प्रति करुणा रहनी चाहिए। अभ्यास से ही यह संभव है।