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विकृत मानसिकता वाले होते है यौन अपराधी

सुरसा के मुँह की तरह बढ़ते यौन अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। आखिर इंसान क्यों हैवान बनता जा रहा है?

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Kamal Singh Rajpoot

Jul 16, 2018

Sexual offender

विकृत मानसिकता वाले होते है यौन अपराधी

सुरसा के मुँह की तरह बढ़ते यौन अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। आखिर इंसान क्यों हैवान बनता जा रहा है? बलात्कारी कोई दूसरी दूसरी दुनिया के नहीं होते। हाँ, विकृत मानसिकता के पालक जरूर होते हैं। ये विकृति कहीं से तो आती होगी न? ये आती है हमारे बीच से ही! हममें सोचने समझने की ताकत ही नहीं कि किसी व्यवहार का या घटना का हमारे बच्चों पर क्या असर होता है। हमारा देश गांवों का देश है। हमें अपने गांव की सादगी वाली संस्कृति पर गर्व भी है। मगर गांव है तो संस्कार पक्के ही बनेंगे इस मिथक से बाहर आइये। शादी- ब्याह के समय जो गांवों में नाच कराया जाता है। वो किसी भी दृष्टिकोण से सांस्कृतिक कार्यक्रम तो नहीं ही होता है। आप चाहे उसे मनोरंजन का साधन मानें या और कुछ। मगर ये आपकी मानसिकता गढ़ता है और आपके बच्चों का व्यक्तित्व। अश्लील गाने और उनपर अश्लीलता की हदें पार करता नाच।ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं है। आप झांकिए कि इस तस्वीर में आपके बच्चे की मानसिकता की नींव है।

बलात्कार, छेड़-छाड़, यौन हिंसा के नये तरीके समाज का आइना बनती जा रही हैं। हम अक्सर कानून और प्रशासन को दोष देकर बच जाते हैं। कभी अपने गिरेबान में झाँक कर देखने की कोशिश ही नहीं करते। आँखें मूंद लेते हैं। क्योंकि हमारे सामाजिक परिभाषा के अनुसार ना तो कभी परवरिश गलत हो सकती है और ना अपने बलात्कार करते हैं! परवरिश गलत होने का बिलकुल ये अर्थ नहीं कि माँ-बाप गलत सिखाते हैं। बल्कि ये अर्थ कि माँ-बाप समझ ही नहीं पाते कि कौन सी घटना बच्चों के मन में क्या बसा रही और उन्हें क्या बना रही।

जीवन का हर दिन अखबार जैसा होता है। अच्छी और बुरी ख़बरों से भरा हुआ। अच्छे और सच्चे पलों को हम कटिंग करके अपने पास सम्हाल कर रख लेते हैं और गलत और बुरी ख़बरों से नज़रें चुरा लेते हैं। मगर ये गलत घटनाएं कभी-कभी दिमाग के कोने में जड़ जमा छिप कर बैठ जाती हैं और डोरमेंट रूप में रहती हैं। जैसे ही इनके मन मुताबिक अवसर आता है ये गलत विचार फल-फूल कर बड़ी हो जाती हैं और भयावह शक्ल अख्तियार करती हैं।

बच्चे सिर्फ टीवी देखकर नहीं बिगड़ते ना ही सिर्फ पश्चिमी सभ्यता का कोढ़ लग रहा समाज में। कमियां हममें भी हैं। मानिये और दूर कीजिये। सच और अच्छाई की जीत तभी संभव है जब किसी भी परिस्तिथि में हम गलत के आगे ना झुकने के लिए दृढ संकल्पित हैं। स्वयं की गलतियां समझें, स्वीकारें और दूर करें। खिखिया कर टालना आसान है। बलात्कारियों के बीच रहना असंभव!

- स्वाति