
आपकी बात, क्या एलोपैथी के साथ दूसरी चिकित्सा पद्धति को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए?
सभी पद्धतियों में समन्वय की जरूरत
वर्तमान समय में दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहन मिलना जरूरी है, क्योंकि अभी कोरोना महामारी में एलोपैथी के भयानक दुष्प्रभाव देखने को मिले हैं। सरकार को सभी पैथियों को साथ जोड़कर रेफर करने की पद्धति को सख्त लागू करना चाहिए। आपातकाल में एलोपैथी का इस्तेमाल हो सकता है। पुरानी बीमारियां और एलोपैथी से ठीक नहीं हो रही बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को रेफर किया जा सकता है। आयुर्वेद और होम्योपैथ के रिक्त पदों को जल्दी से जल्दी भरना चाहिए। इनका बजट भी बढ़ाना चाहिए।
-डॉ. श्रवण कोडेचा, बाड़मेर
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संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद
आयुर्वेद एक संपूर्ण चिकित्सा है। आयुर्वेद में किसी बीमारी के इलाज के लिए एक औषधि के रूप में एक पत्ती को काम में लेते हैं, तो उस पत्ती में मौजूद सभी तत्व यानी संपूर्ण एक्टिव कॉम्पोनेंट्स काम करेंगे, जो एक कंपोनेंट के द्वारा होने वाले लाभ-हानि को दूसरे कंपोनेंट से संतुलित कर देंगे। इससे उस वनस्पति के शरीर पर होने वाले हानिकारक प्रभाव खत्म हो जाएंगे, जबकि एलोपैथ एक अंश मात्र चिकित्सा है। एलोपैथी में वनस्पति का एक एक्टिंग कंपोनेंट निकाला जाता है और फिर उसका चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसका लाभ तो होगा, लेकिन उसके हानिकारक प्रभाव को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए यह कह देना बिल्कुल सही होगा कि आयुर्वेद अपने आप में एक संपूर्ण चिकित्सा है।
-डॉ. जहीर अब्बास, घाटोल, बांसवाड़ा
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आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर ध्यान देने का समय
कोरोना महामारी के दौर में जितना प्रोत्साहन एलोपैथी को मिल रहा है, उसका एक प्रतिशत भी दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को नहीं मिल पा रहा है। बेहतर तो यह है कि हमें इस महामारी से लडऩे के लिए होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, यूनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियों का भी सहारा लेना चाहिए। वर्तमान में हालत तो यह है कि सरकारी आयुष चिकित्सकों को बाकी सुविधाएं तो छोड़ो पर्याप्त दवाइयां तक उपलब्ध नहीं करवाई जाती। बिना दवाइयों के सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सक असहाय हैं। यदि शुरू से ही इनको प्रोत्साहन मिलता, तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ते। आज इतनी ज्यादा मृत्यु दर व संक्रमण दर नहीं होती। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व विकसित करने के लिए आयुष पद्धतियां अति उत्तम हैंै। अत: सरकार आयुष को प्रोत्साहित करे और इन पर खर्च बढ़ाए।
-डॉ.मोतीलाल हिंग्रा, पोकरण
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आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा
एलोपैथी चिकित्सा के साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति भारत की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है। सरकार इस चिकित्सा पद्धति को मुख्यधारा में लाकर लोगों को स्वस्थ रख सकती हैं, क्योंकि आयुर्वेद का प्रथम उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। साथ ही रोगी व्यक्ति को स्वस्थ करना है। अगर आयुर्वेद के प्रथम उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या, ऋतु चर्या, रात्रि चर्या, आहार-विहार का पालन करने के लिए आमजन को प्रेरित किया जाए, तो भारत की अधिकतर जनसंख्या को हम स्वस्थ रख सकते हैं। लोगों को आयुर्वेद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली औषधियों का सेवन अगर नियमित कराया जाए, तो ज्यादातर लोगों को बीमारी से बचाया जा सकता है। यदि कोई बीमार हो भी गया, तो वह जल्दी स्वस्थ हो सकता है। साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सुरक्षित है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। कोरोना काल में लोगों का ंआयुर्वेद के प्रति उत्साह व विश्वास बढ़ा है। हजारों लोग अस्पताल जाने से बचे हैं। अगर सरकार आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देती है, तो निश्चित ही भारत के लोगों का कल्याण होगा। बस जरूरत है तो सिर्फ इसको मुख्यधारा में लाने और एलोपैथी के बराबर बजट देने की।
-डॉ. रामहेत नागर, तलवंडी, कोटा
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संक्रामक बीमारियों के इलाज में एलोपैथी ज्यादा कारगर
एलोपैथी की तरह दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। आयुर्वेदिक, यूनानी आदि प्रमुख पद्धतियां हैं, जो प्राचीन समय से कई गंभीर बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल की जाती रही हैं। एलोपैथी में अनुसंधान पर काफी खर्च किया जाता है। यदि इतना खर्च पुरानी चिकित्सा पद्धतियों पर भी करें, तो बहुत अच्छे परिणाम आते। यह भी सचाई है कि एलोपैथी के आने के बाद से संक्रामक बीमारियों से लडऩे में आसानी हुई है।
-अमृत सिंह राजपुरोहित, चौखा, जोधपुर
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एलोपैथी की भी सीमा
एलोपैथी के समान ही दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को आवश्यकता अनुसार प्रोत्साहन और बजट भी मिलना चाहिए। इस क्षेत्र में काम करने वाले कार्मिकों को भी सभी तरह की सुविधाएं एवं वेतन एलोपैथी कार्मिकों के समान मिलने चाहिए। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली एलोपैथी की अपनी सीमाएं हैं। न तो वह मनुष्य शरीर को संपूर्णता में देखती है और न ही उसका संपूर्णता से इलाज कर सकती हैं। इसलिए एलोपैथी के साथ दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
-सुभाष सिद्ध बाना, श्री डूंगरगढ, बीकानेर
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लक्ष्य रोगी का इलाज हो
एलोपैथी के साथ-साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सक भी इस महामारी से लोगों को बचाने में लगे हैं। कई शहरों में आयुष डॉक्टर कोविड मैनेजमेंट सम्भाल रहे हैं। लक्ष्य रोगी का इलाज होना चाहिए, चाहे किसी भी चिकित्सा पद्धति से किया जाए। एलोपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से एक बेहतरीन चिकित्सा ढांचे का निर्माण होना चाहिए।
-डॉ तरुण तिवारी, उज्जैन
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प्रत्येक चिकित्सा पद्धति का अपना महत्त्व
प्रत्येक चिकित्सा पद्धतियों का रोगी के इलाज में अपना अपना महत्त्व होता है। कुछ चिकित्सा पद्धतियों में रोगियों को देर से आराम मिलता है, तो कुछ पद्धतियों में रोगी को जल्दी आराम मिलता है। इस स्थिति में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ दूसरी चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को भी समय-समय पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए
-नितिन गुप्ता, करेरा, शिवपुरी
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उपयोगी है होम्योपैथी
कोरोना महामारी के दौरान होम्योपैथी का महत्त्व बढ़ गया है। निमोनिया वाली कंडीशन में भी इसका बहुत अच्छा रोल है। यह सस्ती चिकित्सा पद्धति है एवं बीमारियों को जड़ से खत्म करती है। जहां पर एलोपैथिक की लिमिटेशन शुरू होती है, वहां यह पद्धति बहुत अच्छा असर दिखाती है। साथ ही गंभीर एवं असाध्य रोगों में भी इस पद्धति द्वारा बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
-डॉ. शिखा जैन, बांसवाड़ा
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होम्योपैथी को बढ़ावा देने का समय
एलोपैथी के साथ अन्य आयुष पैथियों का विकास और उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए। प्रकृति के संतुलन एवं मानव जाति के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष रूप से सरकार को होम्योपैथी को बढ़ावा देना चाहिए। केंद्र सरकार के साथ सभी राज्य सरकारें होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार के साथ सरकारी क्षेत्र मे होम्योपैथी के यूजी कोर्सेज के साथ पीजी कोर्सेज और सुपर विशेषज्ञ कोर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि होम्योपैथी चिकित्सा के विषय विशेषज्ञ मिल सकें।
-डॉ. नरेन्द्र राठौड़, जालोर
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एक चिकित्सा पद्धति पर न रहें आश्रित
आधुनिक युग में एलोपैथी के साथ-साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। हम एक ही पद्धति पर आश्रित रहकर हर बीमारी का इलाज नहीं कर सकते। इसलिए हमें दूसरी पद्धतियों का उपयोग भी करना चाहिए।
-बलवंत कुमार खंडेलवाल, बानसूर, अलवर
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प्रत्येक चिकित्सा पद्धति का अपना महत्व
सभी प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां परस्पर संबंध बनाए हुए हैं। विशेष बीमारियों में किसी ना किसी चिकित्सा पद्धति का अपना महत्व है। एलोपैथी से पूर्व अन्य चिकित्सा पद्धतियां ही अस्तित्व में हुआ करती थीं। इन चिकित्सा पद्धतियों को दरकिनार न करके एलोपैथी के समकक्ष मानते हुए प्रोत्साहन मिलना ही चाहिए।
-मनोज जैन, टोंक
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अनुसंधान को दिया जाए बढ़ावा
आयुर्वेद और होम्योपैथी पूर्णत: वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा पद्धतियां हैं। सरकार को चाहिए कि वह आयुर्वेद और होम्योपैथी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा दे। आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति कर ध्यान दिया जाए, ताकि इसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचा सकती है !
मिहिर रावल, डूंगरपुर
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घर पर ही इलाज की औषधियां
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को एक बार पुन: स्थापित किया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत काफी सारी बीमारियों का इलाज घर में ही उपलब्ध हो जाता है। साथ ही खेत और जंगल में जो जड़ी-बूटियां मिलती हैं, उनके बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए।
-राजु भामू चिंडालिया, मकराना नागौर
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आयुर्वेद को महत्त्व मिले
आयुर्वेद कई सदियों से चली आ रही चिकित्सा पद्धति है। यह रोग को दबाती नहीं है, बल्कि जड़ से खत्म कर देती है। वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद में से ही निचोड़ कर अलग से एलोपैथिक दवाइयां तैयार कर दीं। इसके बावजूद आयुर्वेद के महत्त्व को स्वीकार करने में हिचकते हैं। आयुर्वेद में शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए, तो आश्चर्यजनक परिणाम सामने आ सकते हैं।
-महेंद्र कुमार शर्मा, जयपुर
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आयुर्वेद है स्वस्थ जीवन का आधार
आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति ही नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन का आधार है। आयुर्वेद सिर्फ चिकित्सा तक ही सीमित नहीं है। आयुर्वेद तो स्वास्थ्य का खजाना है। यदि हम आयुर्वेद के मुताबिक दिनचर्या अपनाएं, योग को अपने जीवन में स्थान दें और आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से जीवन जीएं तो हमारे शरीर में रोग उत्पन्न ही नहीं होंगे। मुश्किल यह है कि हमारी सरकारें आयुर्वेद को प्रोत्साहन ही नहीं देते। यदि सरकार एलोपैथी की तरह आयुर्वेद को भी प्रोत्साहन दे, तो यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम होगा।
-डॉ. तेजवीर सिंह, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
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एलोपैथी में साइड इफेक्ट ज्यादा
यदि मरीज गंभीर स्थिति में हो या उसके रोग की जानकारी के बारे में देर से पता चलता हो तो एलोपैथी पद्धति उचित होगी, लेकिन यदि समय पर रोग का पता चल जाए और मरीज की जान को तत्काल खतरा न हो तो आयुर्वेद सबसे बढिय़ा चिकित्सा पद्धति है। यह बीमारी को जड़ मूल से खत्म करती है, बिना कोई अन्य साइड इफेक्ट के। एलोपैथी में साइड इफेक्ट के खतरे बढ़ जाते हैं।
-आलोक उपाध्याय, बेदला, उदयपुर
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किसी भी एक चिकित्सा पैथी से समूचे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था मुकम्मल नहीं रखी जा सकती! आयुर्वेद सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया, डेंगू और अब कोविड-19 कोरोना से बचाव में अपनी सकारात्मक भूमिका प्रमाणित कर चुकी है। राज्य व केंद्र सरकार आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पैथी घोषित करे, तो बेहतर होगा!
- डॉ.राकेश पाण्डेय
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आयुर्वेद को मुख्यधारा में लाया जाए
आयुर्वेद का प्रथम उद्देश्य ही स्वास्थ्य की रक्षा करना है। मुश्किल यह है कि विभिन्न प्रकार की बीमारियां जब पूरे समाज में व्याप्त हो जाती हैं, तब ही हमें आयुर्वेद की याद आती है। बेहतर तो यह है कि आयुर्वेद को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाए।
-डॉ. अवनेश श्रृंगी, झालावाड़
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अनुसंधान की आवश्यकता
एलोपैथिक चिकित्सा का मजबूत नेटवर्क है जो पूरी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ा हुआ है, जबकि अन्य चिकित्सा विधियां अधिकांशत: अटकल व श्रुत ज्ञान आधारित हैं, जिन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान द्वारा सिद्ध नहीं किया गया है। अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भारत ही नहीं पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिए आवश्यक है कि वैज्ञानिक अनुसंधान का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाए। चिकित्सा शास्त्रियों को सुनी सुनाई बातों पर अमल करने की बजाय आधारभूत अनुसंधान आधारित परिणामों के अनुसार निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
-गिरीश कुमार जैन, इंदौर
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दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को भी प्रोत्साहन मिले
एलोपैथी चिकित्सा पद्धति एक महत्त्वपूर्ण पद्धति है। सर्जरी में ये चिकित्सा पद्धति ही कारगर है। इस चिकित्सा पद्धति मे गंभीर बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी जटिल बीमारियों के स्थाई इलाज की कोई दवा नहीं है। आजीवन दवा लेनी पड़ती है। आयुर्वेद में देशी जड़ी-बूटियों से इलाज किया जाता है, जो सर्वत्र उपलब्ध हंै। इसमें मरीज की बीमारी का स्थाई इलाज किया जाता है। होम्योपैथी पद्धति में तो कई बीमारियों में दवा की एक खुराक से मरीज ठीक हो जाता है। सबसे एलोपैथी दवा बहुत महंगी होती है। होम्योपैथी व आयुर्वेद को बढ़ावा देकर आम आदमी को राहत दी जा सकती है।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
Published on:
24 May 2021 08:24 pm
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