
आपकी बात, क्या भिक्षावृत्ति पर कड़ाई से प्रतिबंध लगना चाहिए?
भिखारियों को प्रशिक्षित किया जाए
भिक्षावृत्ति पर कड़ाई से प्रतिबंध लगना चाहिए। किसी को भी भिक्षावृत्ति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। खास तौर से नकदी रुपए, तो बिल्कुल नहीं देना चाहिए। भूखे व जरूरतमंदों को खाना और कपड़ा फिर भी दिया जा सकता है। भिक्षावृत्ति करने वालों का भी पहचान पत्र होना चाहिए। भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता के हिसाब से प्रशिक्षण देकर काम के बदले अनाज देकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। भिक्षावृत्ति से लोग आलसी और अनैतिक हो जाते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय छवि निर्माण और देश के विकास में भी भिक्षावृत्ति बाधक है
-डॉ. माधव सिंह, सीकर
..........................
नहीं मिलता भरपेट भोजन
देश को आजाद हुुए सात दशक से ज्यादा समय हो चुका है, पर अभी तक देश की बड़ी आबादी दो वक्त की रोटी के लिए तरस रही है। इसके कारण भी भिक्षावृत्ति नहीं रूक रही।
-भरत कोराणा, जालोर
.............................
सरकार रोजगार देने पर ध्यान दे
देश में भिक्षावृत्ति बढ़ रही है, लेकिन इस पर कड़ा प्रतिबंध लगाना ठीक नहीं है। दान-पुण्य के नाम पर कोई किसी की मदद करता है, तो उसे रोकना नहीं चाहिए। सरकार के प्रयास लोगों को शिक्षा और रोजगार प्रदान करने की दिशा में होने चाहिए, जिससे भिक्षावृत्ति का प्रवृत्ति जरूर कम होगी।
-दीप्ति जैन, उदयपुर
..........................
रोकनी होगी भिक्षावृत्ति
समाज में भिक्षावृत्ति की रोकथाम जरूरी है, क्योंकि इससे समाज में अनेक बुराइयां जन्म ले रही है। बड़ी संख्या में छोटी लड़कियां और बच्चे आपराधिक गिरोहों के हाथ लग जाते हैं, जो डरा धमाका कर चोरी, नशा, मानव तस्करी, अपहरण और दूसरे अपराधों की तरफ में धकेल दिए जाते हंै। सरकार व प्रशासन को इनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, लेकिन भिक्षावृत्ति को कड़ाई से रोकना चाहिए।
-निहारिका सिंह, रीवा
....................
भीख मांगना मजबूरी
भिक्षावृत्ति सामाजिक बुराई है, जो आजाद भारत में आज भी मौजूद है। जब लोगों के पास रोजगार और दो वक्त के भोजन का इंतजाम नहीं होता तो मजबूरी में उन्हें भीख मांगनी पड़ती है। बेशक भिक्षावृत्ति पर कड़ाई से प्रतिबंध लगना ही चाहिए, किंतु उससे पहले सरकार ऐसे प्रयास करे कि लोगों को भीख मांगनी ही नहीं पड़े।
-कुशल सिंह राठौड़, जोधपुर
.....................
भारतीय पंरपरा और भिक्षावृत्ति
भिक्षा मांगकर जीवनयापन करना एक साधना है, जो केवल एक साधक ही कर सकता है, जिसे हम भिक्षुक कहते है और यह हमारी संस्कृति और परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। पुराने जमाने में ब्राह्मण, साधु-संत और उपासक लोग केवल भिक्षा मांग कर ही अपना जीवन यापन करते थे। किंतु यह तब सही है जब हम उतनी भिक्षा ले, जितनी जरूरत हो यानी एक साधक की तरह। किंतु जो श्रम से बचने के लिए भिक्षा मागते हैं, उनसे कड़ाई से निपटना चाहिए।
-रवि देववंशी पटवा, कटनी
..............................
भिक्षावृत्ति और अपराध
भीख मांगते हुए भिखारी हर जगह मिल जाते हैं। यद्यपि उनमें से कुछ दयनीय स्थिति में होते हैं, किंतु स्वस्थ लोग भी भीख मांगते नजर आ जाते हैं। पर्यटन स्थलों पर तो ऐसे भिखारी पर्यटकों के पीछे ही पड़ जाते हैं। छोटे बच्चों का अपहरण कर उनको भीख मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसलिए भिक्षावृत्ति को रोकना ही होगा।
-पवन गौतम बमूलिया, अंता, बारां
.........................
समझाइश करे सरकार
भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए पहले भिखारियों की समझाइश करनी चाहिए। उनको सही दिशा में लाने के प्रयास करना चाहिए। उनको शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
......................
भिक्षावृत्ति राष्ट्र पर एक कलंक हैं
भिक्षावृत्ति से राष्ट्र की स्वच्छ छवि कलंकित होती है। भिक्षावृत्ति से विश्व में भारत की छवि खराब न हो, इसलिए सरकार को चाहिए कि वह हर हाथ को पहले काम दे।
-सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
.....................
जरूरतमंदों की मदद करें
एक बड़ी आबादी को भीख मांगने की आदत पड़ गई है। अधिकतर लोग भीख जीने के लिए नहीं, बल्कि पैसा जमा करने के लिए मांगते हैं। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं कि भीख मांगने वाले के पास बैंक खाता ही नहीं अचल संपत्ति भी मिली। जरूरतमंदों की मदद जरूर की जाए, लेकिन आदतन भीख मांगने वालों को हतोत्सािहत किया जाए।
-राजकुमार वर्मा, भिलाई, छत्तीसगढ़
...................................
बेरोजगारी है मुख्य कारण
भिक्षावृत्ति समाज के लिए कलंक के समान है, परंतु इसका मुख्य कारण बेरोजगारी है। अत: राज्य सरकारों को उनके लिए दिहाड़ी व्यवस्था के तहत काम देने का पुख्ता इंतजाम करना चाहिए। भिक्षावृत्ति पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाना इसका समाधान नहीं हो सकता है। यह बिरादरी आखिर कहां जाएगी । अत: संवेदनशील ढंग से इस समस्या का समाधान खोजा जाना चाहिए।
-गजानन पाण्डेय, हैदराबाद
Published on:
13 Dec 2020 11:27 am
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
