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आपकी बात, क्या लोकतंत्र में सरकारों के निर्णय पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Jul 04, 2021

आपकी बात, क्या लोकतंत्र में सरकारों के निर्णय पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए?

आपकी बात, क्या लोकतंत्र में सरकारों के निर्णय पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए?

ताकि निरंकुश न हो सरकार
लोकतंत्र का अर्थ ही है ऐसी शासन व्यवस्था, जिसमें जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जनता के हित में निर्णय लेकर शासन चलाते हैं। यदि जनता सरकार के निर्णयों पर सवाल नहीं उठाएगी, तो सरकार निरंकुश हो जाएगी और व्यवस्था तानाशाह हो जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार सरकारी निर्णयों का आकलन करने और उनके विरुद्ध आवाज उठाने वालों को चुप कराने और सरकारों की अपने गलत निर्णयों पर अडिग रहने की जो प्रवृत्ति पैदा हुई है, उसने लोकतंत्र की समूची अवधारणा को ही खतरे में डाल दिया है। लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए सरकारों को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार के दरवाजे खुले रखने चाहिए और जनता के सवालों का स्वागत करते हुए उनका संतोषप्रद उत्तर देना चाहिए।
-डॉ. मुहम्मद इकबाल सिद्दीकी, जयपुर
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जीवित लोकतंत्र की निशानी
सरकारों के निर्णय पर जिस दिन सवाल उठाने बंद कर दिए जाएंगे, उसी दिन लोकतंत्र की आत्मा की हत्या सुनिश्चित है। आवश्यक नहीं कि सरकारें सभी निर्णय सही ही लें। गलत निर्णय होने पर उन्हें वापस लेने का दबाव बनाना जनता का हक है और इसे कोई नहीं छीन सकता। जीवित लोकतंत्र की निशानी है, आलोचना और सवाल करना।
-श्याम बिहारी शर्मा, कुंभलगढ़, राजसमंद।
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ताकि आंख मूंद कर निर्णय नहीं लिए जाएं
लोकतंत्र में सरकारों के निर्णय पर सवाल उठाना आवश्यक है। गलत निर्णय होने पर न्यायालय में भी जाना चाहिए, ताकि सरकार सही ढंग से काम करे। सरकार के निर्णय पर निश्चित रुप से प्रश्न उठाने चाहिए ,जिससे सरकार आंखें मूंदकर निर्णय नहीं ले।
-चुतराराम प्रजापति हरढ़ाणी ,जोधपुर
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जनता ही सर्वोपरि
लोकतंत्र का अर्थ है जनता का तंत्र, जिसमें जनता ही सर्वोपरि होती है। अगर लोकतंत्र में प्रश्न करने की छूट ही न हो, तो उसे राजसत्ता कहना ज्यादा ठीक होगा। अत: लोकतंत्र में सरकार के निर्णय पर सवाल उठाना चाहिए, परंतु हमको यह भी ध्यान रखना होगा कि हमारा सवाल तर्कसंगत हो।
-प्रगति मिश्रा, सतना, मध्य प्रदेश
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सतर्कता और सजगता जरूरी
चर्चा, बहस, असंतोष तो लोकतंत्र का हिस्सा माना जाता है, फिर सरकारों के निर्णय पर सवाल उठाना गलत कैसे हो सकता है? जनता सिस्टम में विश्वास करे, इसके लिए सरकारों के निर्णय पर सवाल उठाना जायज है। सतर्कता तथा सजगता ही लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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सवाल करना जनता का हक
लोकतंत्र में जनता सरकार बनाती है। अगर सरकार ऐसी कोई नीति बनाती है या फैसला लेती है, जिससे आमजन प्रभावित होता हो, तो सवाल खड़े करना आमजन का शत प्रतिशत हक है, नहीं तो सरकार तानाशाही की राह पर अग्रसर हो सकती है, जो लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर।
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स्वस्थ चिंतन जरूरी
लोकतंत्र में सरकारों के निर्णय पर सवाल उठाना हमारा अधिकार है। इसी में लोकतंत्र की सार्थकता है, परन्तु यह समझना भी आवश्यक है कि हमारा सवाल कहीं किसी अन्य व्यक्ति के मस्तिष्क की उपज तो नहीं। कहीं हम अनजाने में विपक्ष के साइबर सेल के शिकार तो नहीं हो रहे? सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाने से पहले हमें स्वार्थपरकता त्यागते हुए, उस निर्णय के सभी पक्षों के दूरगामी सकारात्मक-नकारात्मक परिणाम पर स्वस्थ चिंतन करना भी अवश्यक है ।
-अशोक कुमार सैन, नोखा, बीकानेर
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जनता का संवैधानिक अधिकार
लोकतंत्र मे शासन का स्रोत जनता होती है। इसलिए देश की जनता सर्वोच्च एवं संप्रभु है। देश में सरकारों के मनमाने फैसलों की आलोचना करना एवं अहिंसक रूप से विरोध प्रदर्शन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है। सरकार से सवाल करना राजद्रोह नहीं हो सकता।
-तेजपाल गुर्जर, हाथीदेह, श्रीमाधोपुर
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सवाल उठाना जरूरी
किसी भी लोकतांत्रिक देश में विपक्ष भी महत्वपूर्ण होता है। विपक्ष की जिम्मेदारी यही होती है कि सरकार के जो निर्णय जनता के हित में न हों, उन पर सवाल खड़े करे या आलोचना करे। सरकार को उस देश की आम जनता चुनती है और जनता को यह हक होता है कि वह अपनी सरकार के निर्णयों से सहमति या असहमति दर्ज कराए। सहमति की स्थिति में सवाल उठाए। अगर ऐसा नहीं होगा तो किसी भी लोकतांत्रिक देश की सरकार निरंकुश होकर किसी भी तरह के फैसले ले सकती है। अत: इस स्थिति से बचने के लिए जहां जरूरी हो, सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
- अविनाश, बैंगलूरु
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हिंसक विरोध न हो
लोकतंत्र की मर्यादाओं का पालन करते हुए सवाल उठाते रहना चाहिए। लोकतंत्र में सभी लोगों को सरकार के गुण-दोष के आधार पर आलोचना विरोध करना जरूरी है, जिससे जनता के सामने सारी स्थिति स्पष्ट हो सके। हिंसक विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। चुनी हुई सरकारों को भी विरोध के स्वर को दबाना नहीं चाहिए। जनता की बातों को ध्यान से सुनने के बाद अपने निर्णय में तर्कसंगत सुधार करते रहना चाहिए।
-माधव सिंह, श्रीमाधोपुर सीकर
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लोकतंत्र का अर्थ
अब्राहम लिंकन ने कहा था कि 'लोकतंत्र जनता के द्वारा जनता के लिए, जनता का शासन है।Ó इसलिए लोकतंत्र का अर्थ हुआ लोगों का शासन। सरकारों का निर्वाचन जनता के हित के लिए होता है। यदि सरकार जनता के हितों की उपेक्षा करती हैं तो सरकार पर सवाल उठाना संविधान के अनुकूल है। सवाल न उठाने पर सरकारें निरंकुश हो जाएंगी और फिर लोकतंत्र ही नहीं रह पाएगा। जब सरकार जनता के विरुद्ध या संविधान के प्रतिकूल निर्णय लेती हैं, तो उस निर्णय पर सवाल उठाना बेहद जरूरी है। ।
-बाबू लाल लोथिया, छत्तरगढ, बीकानर
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सवाल उठाना लाजिमी
लोकतंत्र में सरकार यदि जनविरोधी कोई निर्णय लेती है या कोई ऐसा कानून बनाती है जिससे नागरिकों का अहित हो, तो ऐसे में जनता को एवं विरोधी दल को हक है कि वह सरकार के गलत निर्णयों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करे। सरकार यदि राष्ट्रीय हित में कोई निर्णय लेती है तो बिना तथ्यों के विरोध में ऐसे सवाल भी न उठाए जाएं राष्ट्रीय हित पर कुठाराघात हो ।
-तेजनारायण श्रीवास्तव, गंजबासौदा
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विरोध शांतिपूर्वक किया जाए
जब जनता ही सरकार चुनती है, तो सरकार के निर्णयों पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाने चाहिए? यदि जनता को लगता है कि कोई निर्णय उसके हित में नहीं है, तो सवाल तो उठेंगे ही। यदि सरकार का कोई निर्णय गलत नजर आता है, तो विपक्षी दल एवं जनता को निडर होकर आवाज उठानी चाहिए। मतभेद, असहमति होना लाजिमी है, लेकिन जनता को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचानी चाहिए।
-लक्ष्मण नायडू, रायपुर, छत्तीसगढ़
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संविधान सर्वोपरि
लोकतंत्र में सर्वोच्च स्थान संविधान का है। सरकारें तो आती जाती रहती हैं। ऐसे में उनके निर्णयों पर सवाल उठाना अवमानना का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए। ना ही यह लोकतंत्र पर सवाल उठाने जैसा है। वास्तविक लोकतंत्र का तो अर्थ ही जनता का, जनता के लिए जनता द्वारा शासन है, ऐसे में जनहित और जनकल्याण के लिए सरकारों पर सवाल उठाना स्वस्थ लोकतंत्र के विकास में सहयोगात्मक घटक है, लोकतंत्र में मीडिया तथा मजबूत विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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सवाली करना गलत नहीं
लोकतंत्र का अर्थ ही जनता की स्वतंत्रता का रक्षण करना है, संविधान स्वयं जनता को अपनी बात रखने का अधिकार देता है। चुनी हुई सरकारों से सवाल करना गलत नहीं है। यदि जनता सरकार के निर्णयों से असंतुष्ट है, तो सरकार को जनता का विश्वास प्राप्त करना होगा, कोई भी सरकार जनता के सहयोग बिना नहीं चल सकती।
-शुभम् दुबे, इंदौर, मध्यप्रदेश
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अपने अधिकार का इस्तेमाल जरूर करें
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जनता द्वारा निर्वाचित होती है। सरकार द्वारा कोई भी निर्णय लेने से पूर्व आमजन के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। विगत कुछ वर्षों में सरकार के निर्णयों में राजनीतिक दृष्टिकोण अधिक समाहित हो रहा है। सरकार के कुछ निर्णय ऐसे भी होते हैं जो सर्वजन हिताय नहीं होते हैं। ऐसे में यदि आमजन को लगता है कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णय गलत हैं, तो सरकार के खिलाफ आवाज मुखर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में आमजन का मूल अधिकार है। यदि आमजन अपने इस अधिकार का उपयोग नहीं करेगा, तो इस लोकतांत्रिक व्यवस्था का मखौल बन जाएगा। सरकारें निरंकुश व तानाशाही प्रवृत्ति को जन्म देंगी। आमजन के हित दब कर रह जाएंगे और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जो राष्ट्र के अमन-चैन के लिए सही नहीं है।
-सुदर्शन शर्मा, चौमूं, जयपुर
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जनता से बढ़कर कोई नहीं है। लोकतंत्र में सरकारें जनता द्वारा जनता के लिए चुनी जाती हैं। लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकारों के निर्णय पर अपनी राय रखने का अधिकार है। लोगों को निर्णय की आलोचना और विरोध करने का पूरा-पूरा अधिकार है। कोई भी सरकार जनता का विरोध करने से नहीं रोक सकती।
-प्रकाश चन्द्र राव, बापूनगर, भीलवाड़ा
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मीडिया का साथ जरूरी
आजकल सरकार ही सब कुछ है। सब उसके गुणगान करने लगे हैं। सरकार के खिलाफ बोलने वाला देशद्रोही की पंक्ति में खड़ा हो जाता है। मीडिया भी सरकार से प्रभावित है, तो जनता अपनी आवाज कैसे उठाएगी? लोकतंत्र में अपनी बात रखने का हक सबको होना चाहिए। मीडिया का काम है कि वह जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाए।
-एजाज शेख, खरगोन
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सवाल करना नागरिकों का अधिकार
शासन - प्रशासन की कमियों तथा गलत सरकारी नीतियों पर सवाल उठाकर ही लोकतंत्र को तानाशाही राजतंत्र में तब्दील होने से रोका जा सकता है। लोकतंत्र का अर्थ ही लोगों का, लोगों के लिए , लोगों द्वारा शासन है। कृषि कानून, बैंक, रेलवे के निजीकरण, नई पेंशन नीति के संदर्भ में हो रहे आंदोलन में जनाक्रोश दिखता है, जो सुदृढ़ लोकतंत्र के निर्माण का ही भाग है । संवैधानिक दायरे में रहकर सरकार से सवाल करना लोकतंत्र में सभी नागरिकों का अधिकार है ।
-अभिजीत मूंड, खींवासर, झुंझुनूं