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Patrika Opinion: मां-बाप की देखभाल करें, जिम्मेदारी निभाएं

न्यायालय ने अपने फैसले में साफ किया है कि बुजुर्ग अभिभावकों की इच्छा पूरी करना बच्चों का दायित्व है। अदालत ने कहा है कि बच्चे मां-बाप को भोजन-पानी ही नहीं, वांछित सम्मान भी दें।

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Nitin Kumar

Sep 11, 2023

Patrika Opinion: मां-बाप की देखभाल करें, जिम्मेदारी निभाएं

Patrika Opinion: मां-बाप की देखभाल करें, जिम्मेदारी निभाएं

इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज की दुनिया भौतिक युग में जी रही है। ऐसा युग जहां रिश्तों की जगह धन हावी होता जा रहा है। ऐसा भौतिक युग जहां माता-पिता और बच्चों के बीच भी अदालतों को दखल देना पड़ रहा है। न सिर्फ दखल देना पड़ रहा है बल्कि बच्चों को पाबंद करना पड़ रहा है कि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करें और उनको सम्मान दें। मद्रास उच्च न्यायालय का ऐसा ही एक फैसला आज के समाज में खून के रिश्तों पर सवाल खड़ा करने वाला है। न्यायालय ने अपने फैसले में साफ किया है कि बुजुर्ग अभिभावकों की इच्छा पूरी करना बच्चों का दायित्व है। अदालत ने कहा है कि बच्चे मां-बाप को भोजन-पानी ही नहीं, वांछित सम्मान भी दें। न्यायालय का यह फैसला सिर्फ किसी बच्चे और अभिभावकोंं के बीच संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है। इसे व्यापक अर्थों में देखने और समझने की जरूरत है। संवेदनशील मानसिकता के निर्माण से समाज का माहौल बदल सकता है।

सवाल यह है कि जो माता-पिता कष्ट सहकर भी अपने बच्चों को अच्छी जिंदगी देने की भरपूर कोशिश करते हैं, उन्हीं मां-बाप के बुजुर्ग होने पर बच्चे उनकी देखभाल से जी क्यों चुराने लगते हैं? बच्चों की नजर मां-बाप की संपत्ति तक ही सीमित होकर क्यों रह जाती है? ऐसी बात नहीं है कि सभी बच्चे अपने मां-बाप की उपेक्षा कर रहे हैं, लेकिन आसपास नजरें घुमाने पर ऐसे मामले हर कहीं नजर आ जाते हैं। जाहिर है ऐसे मामले बढ़ रहे हैं।

माता-पिता की उपेक्षा करने वाले बच्चे यह क्यों नहीं समझते कि उम्र के जिस दौर से उनके माता-पिता गुजर रहे हैं, कल उसका सामना उन्हें भी करना पड़ेगा। विचारणीय सवाल यह है कि क्या न्यायालय का काम बच्चों को मां-बाप की सेवा करने की नसीहत देने का होना चाहिए? जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगता है, तब न्यायालयों को ऐसे मामलों में कड़े निर्णय लेने पड़ते हैं और तीखी टिप्पणी करनी पड़ती है। भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की सोच रखने वाला देश है। ऐसी सोच जिसमें पूरा विश्व एक परिवार है। ऐसे विलक्षण विचार को जन्म देने वाले देश में यदि बच्चे अपने मां-बाप की देखभाल से बचने लगें और उनका अपमान तक करने लगें, तो चिंता होना स्वाभाविक है। एकल परिवारों की वजह से भी यह समस्या बढ़ी है। समस्या का समाधान निकाला जाता है, समस्या की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारी से बचने वाले अपने लिए भी मुश्किल खड़ी कर लेते हैं। चाहे जो स्थिति हो, माता-पिता के प्रति बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास रहना चाहिए।