
jee results
जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणाम में सफल होने वाली छात्राओं की संख्या पहली बार 10 हजार के आंकड़े को पार कर गई। वर्ष 2016 में जहां सिर्फ 4,570 छात्राएं इस कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण कर पाई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 10,107 हो गई है। इसे एक सांख्यिकीय उपलब्धि ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज में बेटियों के प्रति नजरिये में बदलाव, उनके लिए बढ़ते अवसरों के साथ बेटियों के आत्मविश्वास का प्रमाण है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि लंबे समय तक इंजीनियरिंग को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है। इसी वजह से तकनीकी शिक्षा संस्थानों में लड़कियों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम ही रहती आई है।
यह कहा जा सकता है कि बेटियों को लेकर सामाजिक धारणाएं, संसाधनों की कमी और कई बार परिवारों की सोच जैसे कारण बेटियों के इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे नहीं आने के लिए जिम्मेदार रहे। लेकिन पिछले एक दशक में तस्वीर तेजी से बदली है। सरकार की विभिन्न योजनाओं, छात्रवृत्तियों, जागरूकता अभियानों और परिवारों के बदलते नजरिये ने लड़कियों को विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा की ओर आगे बढऩे का अवसर दिया है। आज बेटियां न केवल मेडिकल, प्रशासनिक सेवाओं और शोध के क्षेत्र में, बल्कि इंजीनियरिंग जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। इस उपलब्धि के बीच इस बार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में 791 सीटें बढ़ाने का निर्णय भी स्वागतयोग्य है। सीटों की संख्या बढऩे से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर मिलेगा। हालांकि, इस उपलब्धि के साथ एक गंभीर प्रश्न यह भी जुड़ा हुआ है कि क्या इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले सभी युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिल पा रहा है? देश में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्नातक रोजगार या गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्धता की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
कई सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त करने वाले अनेक छात्र उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल विकसित नहीं कर पाते। उन्हें या तो कम वेतन वाली नौकरियों से संतोष करना पड़ता है या फिर वे अपने विषय से अलग क्षेत्रों में रोजगार तलाशते हैं। ऐसे में केवल सीटें बढ़ाना या प्रवेश के अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, उद्योगों से जुड़ाव, शोध संस्कृति और व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी समान महत्त्व देना चाहिए। एआइ, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण देना समय की मांग है। इस सकारात्मक तस्वीर के बीच सरकार का लक्ष्य यह होना चाहिए कि प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे अवसर भी मिलें, जहां उनकी क्षमता का पूरा उपयोग हो सके। तभी यह उड़ान केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के विकास और नवाचार की नई कहानी लिखेगी।
Published on:
05 Jun 2026 02:54 pm
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