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जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अहम है यह मौका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका यात्रा: यह भारत में अमरीका के कई हितों को भी रेखांकित करती है

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Patrika Desk

Jun 22, 2023

जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अहम है यह मौका

जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अहम है यह मौका

सौरभ तोदी
रिसर्च एनालिस्ट, तक्षशिला इंस्टीट्यूशन
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शांभवी नाइक
हैड, रिसर्च, तक्षशिला इंस्टीट्यूशन
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भारत और अमरीका ने वर्ष 2022 में महत्त्वपूर्ण व उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के लिए एक भारत-अमरीकी पहल (आइसीईटी) की घोषणा की थी जिसके तहत सरकारों, व्यवसायों और शैक्षिक संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र चिह्नित किए गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल दोनों ही इसकी महत्ता को रेखांकित कर चुके हैं। इस पहल के तहत जैव प्रौद्योगिकी को एक सहयोग क्षेत्र माना गया है लेकिन इस क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए कोई पहल अभी तक नहीं की गई है। प्रधानमंत्री मोदी की अमरीका यात्रा इस क्षेत्र में साथ काम करने पर आपसी सहमति बनाने का एक शानदार अवसर है।

अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हाल ही टिप्पणी की थी कि भारत-अमरीकी साझेदारी के केंद्र में उनके आपसी आर्थिक संबंध हैं। इस साझेदारी में जैव अर्थव्यवस्था एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है, इस तथ्य को पहचानना और इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में साझेदारी को विकसित करना समझदारी होगी। जैव अर्थव्यवस्था के तहत जीडीपी विकास दर और रोजगार में वृद्धि, स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और दीर्घकालिक विकास का रास्ता तैयार करना शामिल हैं। अमरीका और भारत दोनों देशों ने घरेलू औद्योगिक क्षमता के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास क्षमता को प्रोत्साहन देने का इरादा जाहिर किया है।

भारत व अमरीका के बीच इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय सहयोग के तीन मुख्य कारण हैं। पहला, अनुसंधान के क्षेत्र में अमरीका व भारत पूरक शक्तियां हैं और इनकी जैव विनिर्माण क्षमता इन्हें आर्थिक सहयोग का स्वाभाविक सहयोगी बनाती हैं। दूसरा, जैव आधारित आपूर्ति शृंखला जैसे कि बायोफार्मास्युटिकल्स या एन्जाइम को विविधता प्रदान करने में चीन के बाद भारत ही आदर्श विकल्प है जिससे वैश्विक स्वास्थ्य संकट और युद्ध जैसी वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवस्था की स्थिति में अर्थव्यवस्था बाधित नहीं होगी। तीसरा, जैव सुरक्षा के क्षेत्र को नई ऊंचाई देने में भारत और अमरीका का साझा हित भी है।

भारत की राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति 2021-2025 के अनुसार, भारतीय जैव अर्थव्यवस्था की कीमत वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर होने की संभावना है, जो 2021 में 80 अरब डॉलर थी। अमरीकी अर्थव्यवस्था पहले ही एक ट्रिलियन डॉलर है और अमरीकी सरकार ने इस क्षेत्र में 2 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धता दिखाई है। इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हर एक नवीन रोजगार के सृजन से सहयोगी क्षेत्रों में 1.76 रोजगार भी जुड़ते हैं। इस प्रकार रोजगार सृजन में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

वर्तमान में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में चीन का दबदबा है और वह भविष्य में इसको और मजबूत करने की योजना बना रहा है। केवल भारत ही चीन की प्रतिस्पर्धी कीमतों पर स्केलिंग क्षमता उपलब्ध करवा सकता है। आइसीईटी का इस्तेमाल उन परियोजनाओं में सहयोग के लिए करना समझदारी होगी जो जैव विनिर्माण सुविधाओं के विस्तार में सहायक हों। उदाहरण के लिए, कई दवाओं पर अमरीकी पेटेंट अगले कुछ सालों में अवधिपार हो जाएगा। भारतीय कम्पनियां अमरीकी कम्पनियों के साथ मिल कर इसका लाभ उठा सकती हैं। इसके अलावा, अमरीका व भारत, भारत में निर्मित अमरीकी पेटेंट वाले उत्पाद खरीदने के लिए अग्रिम खरीद समझौते कर सकते हैं। वैक्सीन व चिकित्सा के लिए ऐसे समझौते मांग को प्रोत्साहित कर भारत के जैव विनिर्माण क्षेत्र को उछाल दे सकते हैं।

निष्कर्ष यही है कि जैव सुरक्षा भारत और अमरीका के लिए चिंता का मुख्य विषय होना चाहिए। मौजूदा भारत-अमरीका जैव सुरक्षा संवाद को क्रमोन्नत कर इसमें मंत्रालयी स्तर की वार्ता का समावेश किया जाना चाहिए। भारत और अमरीका संयुक्त रोगाणु निगरानी और महामारी प्रतिक्रिया अभ्यास के साथ जानकारियां साझा करने के लिए संयुक्त तंत्र विकसित कर सकते हैं। आइसीईटी को लेकर सतर्कता के साथ आशान्वित रहने की जरूरत है क्योंकि यह पहल महत्त्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकियों के जरिए भारत-अमरीकी साझेदारी को और मजबूत बना सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की अमरीक यात्रा के दौरान आइसीईटी के तहत जेट इंजन व सेमीकंडक्टरों संबंधी महत्त्वपूर्ण समझौते किए जा सकते हैं। जैव प्रौद्योगिकी और जैव विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना आपसी सहयोग सूची का अगला बिंदु हो सकता है।