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पर्यटन ने बढ़ाई प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

प्लास्टिक का उपयोग कम करना होगा और ऐसे उत्पादों को चुनना होगा, जो कागज या कांच से बने हुए हों। प्लास्टिक में पैक उत्पादों से बचना होगा।

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Nitin Kumar

Aug 16, 2023

पर्यटन ने बढ़ाई प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

पर्यटन ने बढ़ाई प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

डॉ. लीना शर्मा
प्रोफेसर, वनस्पति शास्त्र
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जगन्नाथपुरी में रथ यात्रा का उत्सव था, उसमें शामिल तो नहीं हो पाई, लेकिन नवदीप (बंगाल में श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म स्थान) जाकर रुकी। नवदीप के पास ही है मायापुर जहां विश्व का सबसे बड़े इस्कॉन मंदिर का निर्माण हो रहा है। नवदीप व मायापुर के बीच गंगा और जलंगी नदियों का संगम है। नदी पार जाने का साधन नौका और स्टीमर हैं। वहां किनारे पर मैंने देखा कि छोटे-छोटे प्लास्टिक पाउच में मिष्टी दही, पानी, बिस्किट, आइसक्रीम, चॉकलेट बेचने वाले चिल्ला रहे थे और लोग खरीद कर स्टीमर में बैठ रहे थे। स्टीमर में खाने का आनंद लेकर वे खाली बोतलों, थैलियों, पाउचों को गंगा नदी में फेंक रहे थे। संगम के उस पार उतर कर देखा प्लास्टिक के कूड़े का ढेर जमा है। मायापुर आने-जाने का क्रम तीन दिन तक चला और यही सब देखने को मिला।

मेरी अगली यात्रा थी गंगासागर। वहां भी यही सब दृश्य था। लोग पूजा की सामग्री के रैपर, प्लास्टिक की थैलियां, स्ट्रा, मिनरल वाटर की बोतलें सभी सिंधुराज को अर्पण कर रहे थे। कहीं चप्पल बह रही थी, कहीं बोतलें तैर रही थीं। सरिताओं के स्वामी को प्रणाम कर अगले दिन जगन्नाथपुरी पहुंच भगवान जगन्नाथ के दर्शन गुंडीचा मंदिर में किए। गुंडीचा मंदिर के बाहर ही भगवान के रथ नंदीघोष, दर्पदलन और तालध्वज खड़े थे। भगवान का प्रसाद भगवान जगन्नाथ के मंदिर में मिट्टी की हांडियों में लकड़ी के चूल्हे पर ही बनता है और मिट्टी के बर्तनों में, पत्तों से निर्मित पत्तलों में और ताड़ के पत्तों से बने डिब्बों में बेचा जाता है। मंदिर में प्लास्टिक के प्रवेश को अनुमति नहीं है। मंदिर में महाप्रसाद बनाने से लेकर भक्तों को वितरित करने तक कहीं भी प्लास्टिक बर्तनों या थैलियों का उपयोग नहीं होता है।

पर्यटन और प्लास्टिक प्रदूषण परस्पर जुड़े हुए मुद्दे हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। आज हम प्लास्टिक के बिना जीवन की कल्पना कर ही नहीं सकते, क्योंकि चारों ओर से हम प्लास्टिक से घिरे हैं, यहां तक कि पढ़े जा रहे शब्द भी प्लास्टिक के कीबोर्ड पर टाइप हुए हैं। बेल्जियम के रसायनज्ञ लियो बैकलैंड ने 1907 में पहली पूर्ण सिंथेटिक प्लास्टिक का आविष्कार किया था। आज यही आविष्कार वरदान के साथ अभिशाप में बदल गया है।
हाल के वर्षों में पर्यटन तेजी से बढ़ा है। इसलिए पर्यटकों द्वारा एकल उपयोग प्लास्टिक की खपत भी तेजी से बढ़ी है, जिसके परिणाम स्वरूप महत्त्वपूर्ण मात्रा में प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है जो पर्यावरण विशेषकर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा पैदा करता है। पर्यटन उद्योगों का संचालन प्लास्टिक प्रदूषण में विशेष योगदान देता है, जिसमें होटल, रेस्त्रां और टूर पैकेज में एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग शामिल है। ये वस्तुएं, जैसे प्लास्टिक की पानी की बोतलें, स्ट्रा और खाद्य पैकेजिंग की सामग्री गैर जिम्मेदाराना तरीके से त्याग दी जाती है, जिससे प्रदूषण होता है।

प्लास्टिक का उपयोग कम करना होगा और ऐसे उत्पादों को चुनना होगा, जो कागज या कांच से बने हुए हों। प्लास्टिक में पैक किए गए उत्पादों से यथासंभव बचना होगा। जब भी संभव हो , उपयोग की गई प्लास्टिक की थैलियों को किसी दुकानदार या सब्जी वाले को देकर प्लास्टिक को रीसाइकल कर सकते हैं। प्लास्टिक मुक्त कार्यस्थल को बढ़ावा देकर हम प्लास्टिक कचरा उत्पादन को कम कर सकते हैं।

पर्यटकों एवं पर्यटन उद्योग दोनों को पर्यावरण मित्र परंपराओं को अपनाना होगा। व्यक्ति एकल उपयोग प्लास्टिक को न चुनकर पुन: उपयोग में ली जा सकने वाली वस्तुओं को अपनाकर और नदियों तथा समुद्र तट की सफाई में भाग लेकर अपने प्लास्टिक पद चिह्नों को कम कर सकते हैं। प्लास्टिक मुक्त विकल्प प्रदान करने और अपशिष्ट कटौती और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने जैसे उपायों को लागू कर प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा सरकार और पर्यटन अधिकारी प्लास्टिक की खपत को सीमित करने और पर्यटन उद्योग के भीतर पर्यावरण मित्र परंपराओं को बढ़ावा देने वाली नीतियों को लागू कर सकते हैं। वे व्यवसाय को वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री, अपशिष्ट प्रबंधन और गैर जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दंड लागू करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

भारत के केरल के कन्नूर जिले ने प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी है और अप्रेल 2017 में इसे भारत का पहला प्लास्टिक मुक्त जिला घोषित किया गया है। प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध और शुल्क लगाकर काफी कुछ इसके उपयोग को कम किया जा सकता है। प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और अधिक टिकाऊ पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए पर्यटन व्यवसाइयों, सरकारों और गैर सरकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। ऐसा करके हम अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कर सकते हैं, जैव विविधता को संरक्षित कर सकते हैं और पर्यटन उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।