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ट्रैवलॉग अपनी दुनिया: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली !

- नदी द्वीप माजुली घूमने के साथ यहां के लोगों, यहां के जीवन और यहां की सांस्कृतिक बहुलता को समझने का प्रयास आपको अनोखा अहसास देगा।

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ट्रैवलॉग अपनी दुनिया: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली !

ट्रैवलॉग अपनी दुनिया: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली !

संजय शेफर्ड

ऐसा लगता है कि स्मृति एक यात्रा है। मेरी जब सारी यात्राएं समाप्त हो जाती हैं तो ये स्मृतियां ही हैं जो मुझे गतिशील रखती हैं। इन्हीं के माध्यम से पूर्व में की गई यात्राओं को दोहराता हूं। इस बार मेरी स्मृतियों में जो जगह उभरी है, वह है असम का माजुली द्वीप जिसे विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप कहा जाता है। हालांकि इसे लेकर विवाद भी है।

बनानाल, अमेजन, माराजो दुनिया में कई बड़े द्वीप हैं, किन्तु इनके एक सिरे पर अटलांटिक महासागर है। मौजूदा क्षेत्रफल के आधार पर बांग्लादेश का हटिया नदी द्वीप भी दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप नहीं है। माजुली द्वीप आकार की दृष्टि से कभी 1286 वर्ग किमी. में फैला था जो महज 421.65 किमी. ही रह गया है।

सितम्बर 2016 में गिनीज वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉड्र्स ने माजुली को सबसे बड़े नदी द्वीप का दर्जा दिया। जिला घोषित होने के साथ ही माजुली, अब भारत का सबसे पहला नदी द्वीप जिला भी हो गया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित इस द्वीप के बनने के पीछे का तथ्य यह है कि सातवीं शताब्दी की शुरुआत में माजुली जमीन के बड़े टुकड़े का ही हिस्सा था, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी की धारा बदलने और रेत जमा होने से यह धीरे-धीरे द्वीप में तब्दील हो गया। मिट्टी और रेत के लगातार जमाव से यह भूमि उपजाऊ होने लगी और एक बड़े हिस्से को जन बस्ती के लिए उपयुक्त बनाया।

माजुली द्वीप असमिया सभ्यता का मूल स्थान और पांच सदी से असम की सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यह द्वीप अपने वैष्णव नृत्यों, रास उत्सव, टेराकोटा और पर्यटन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। प्राचीन काल की तरह यहां गुरुकुल परंपरा अभी भी जारी है। माजुली को सत्रों की भूमि कहा जाता है जो कि यहां की प्रसाशनिक व्यवस्था को बरकरार रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शुद्ध वातावरण इसे फूलों और वनस्पतियों के अनुकूल बनाता है। खेती और मछली पकडऩा लोगों की आजीविका का प्रमुख जरिया है। मुखौटे बनाना कभी यहां का प्रमुख व्यवसाय था, जो धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। माजुली के संबंध में कहा जाता है कि यहां जितनी नावें हैं, उतनी इटली के वेनिस में भी नहीं होंगी। मेरी चिंताओं में इस नदी द्वीप का सिकुडऩा, एक विविधतापूर्ण संस्कृति का खत्म हो जाना है। इसके कारण प्राकृतिक हैं। ब्रह्मपुत्र की बाढ़ हर साल माजुली का एक टुकड़ा बहा ले जाती है। कुछ सर्वेक्षण बताते हैं कि यह द्वीप 15-20 सालों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा, तो कुछ का दावा एकदम विपरीत है।

फिलहाल माजुली को बचाया जा सके, इसके लिए यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस जगह पर अगर आप आते हैं तो घूमने के साथ यहां के लोगों, यहां के जीवन और यहां की सांस्कृतिक बहुलता को समझने का प्रयास करें, आपको अच्छा लगेगा। आपको अहसास होगा कि माजुली जैसी खूबसूरत जगह धरती पर और नहीं है।

(लेखक ट्रैवल ब्लॉगर हैं और मुश्किल हालात में काम करने वाले दुनिया के श्रेष्ठ दस ब्लॉगर में शामिल हैं)