चार दिन पहले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर हुई बातचीत इस अंजाम पर पहुंचेगी, यह सवाल शायद हमारे विदेश विभाग के कर्ता-धर्ताओं ने भी नहीं सोचा होगा। क्या आज उन्हें नहीं लगता कि मोदी की शरीफ से बात करा उन्होंने गलती की। जहां तक सवाल भारत की आम जनता का है, वह तो पूरी तरह आश्वस्त है कि पाकिस्तान के शासक, फिर चाहे वह जिन्ना हों या कैप्टेन अयूब और जुल्फिकार अली भुट्टो हों या जनरल मुशर्रफ कोई भारत का सगा नहीं है।