ईमानदार तो मौनमोहन भी थे लेकिन भ्रष्टो को वे भी नहीं रोक पाए। सीधा-सा अर्थ है कि भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। हम मिट जाएंगे लेकिन भ्रष्टाचार को नहीं मिटा पाएंगे। अब तो यह हालत है कि इस देश की आम जनता भ्रष्टाचार और बेईमानी के लिए यह गीत गाने लगी है- तेरे संग जीना, तेरे संग मरना। इस देश में जब इंसान पैदा होता है तब से भ्रष्टाचार उसका साथ पकड़ता है और जब मरता है उसके बाद भी साथ नहीं छोड़ता। भ्रष्टाचार न हुआ मानो शैतान हो गया हो। - राही