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आपकी बात, धार्मिक कट्टरता बढऩे का देश पर क्या असर पड़ता है ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Jan 29, 2023

आपकी बात, धार्मिक कट्टरता बढऩे का देश पर क्या असर पड़ता है।

आपकी बात, धार्मिक कट्टरता बढऩे का देश पर क्या असर पड़ता है।

कट्टरता से हो जाते हैं देश नष्ट
कट्टरता राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा है। कट्टरता से देश में आतंकी गतिविधियों और अलगाववाद को फलने-फूलने का अवसर मिला रहा है। कट्टरता के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी विनियमन जरूरी है। चरमपंथ और कट्टरतावाद को केवल बल के इस्तेमाल से पराजित नहीं किया जा सकता। इसके लिए गुमराह युवाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना होगा। इतिहास गवाह है कि हिंसा, कट्टरवाद ने कई देशों को नष्ट किया है। निश्चित ही हम ऐसे देशों में शामिल होना नहीं चाहेंगे। जरूरत है कि हम वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति को पुनर्जीवित करें।
-कनिष्क माथुर, जयपुर
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देश के विकास में बाधा
देश में धार्मिक कट्टरता के कारण आपसी प्रेम-भाव का वातावरण खत्म होकर नफरत और भय का वातावरण बन जाता है, जो देश के विकास को भी अवरुद्ध कर देता है। अत: भारत जैसे विकासशील देश में धार्मिक कट्टरता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
- कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरू
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वैश्विक समस्या
धार्मिक कट्टरता सांप्रदायिक समरसता बनाने में सबसे बड़ी बाधा है। सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए। सभ्य समाज में धार्मिक कट्टरपंथी सोच का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सभी धर्मों में अच्छी बातें बताई गई हैं। आतंकवाद, हिंसा, सांप्रदायिक तनाव आदि धार्मिक कट्टरता के ही परिणाम हंै। यह आज की बड़ी वैश्विक समस्या है।
- आर के यादव, नीमराना, अलवर
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राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी
जिस प्रकार देश में धार्मिक कट्टरता बढ़ती जा रही है, वह बहुत नुकसानदायक है। हमें सबसे पहले इंसानियत के धर्म को महत्व देना होगा, जिससे धर्म के नाम पर आपसी वैमनस्यता एवं उन्माद न बढ़े। राजनीतिक पार्टियों को भी धार्मिक कट्टरता को बढ़ाने का खेल रोकना होगा।
-महेश आचार्य, नागौर
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अराजकता को बढ़ावा
धार्मिक कट्टरता बढऩे का तात्पर्य है कि अन्य धर्मों की अपेक्षा अपने ही धर्म को सम्मान देना और अन्य धर्मों के प्रति नफरत रखना, घृणा का भाव रखना। अर्थात अपने धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वालों से घृणा करना। इससे देश में अलगाव व अराजकता को बढ़ावा मिलता है।
-गोपाल सिंह, नदबई, भरतपुर
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बढ़ेगी हिंसा
धार्मिक कट्टरता बढऩे से राष्ट्र का विकास रुकेगा। साथ ही हिंसा भी बढ़ेगी, जो राष्ट्र के लिए बिल्कुल ठीक नहीं होगा।
-गणेश राजभर, बैंडेल, हुगली, प.बं
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बढ़ता है उन्माद
देश में धार्मिक कट्टरता बढऩे से देश मेंं शांंति, अमन-चैन भंग होकर देश भर मेंं हिंसा, अशांति, उन्माद में निरंतर वृद्धि होती रहती है।
-ओमप्रकाश श्रीवास्तव, उदयपुरा मध्यप्रदेश
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गुमराह युवा
समाज में वैमनस्य की भावना बढ़ती है. धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले अपने फायदे के लिए युवाओं को उकसाकर, गलत राह पे चलाकर पूरे देश का भविष्य खतरे में डाल रहे हैं। राष्ट्र निर्माण की भावना पीछे छूट जाती है और नफरत का माहौल पनपता है।
-सोनल कुमारी सैनी, सीकर
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बढ़ता है वैमनस्य
धार्मिक कट्टरता बढऩे से समाज में वैमनस्य बढ़ता है और एक दूसरे को संदेह की दृष्टि से देखने लग जाते हंै। समाज में आपसी लड़ाई-झगड़े बढऩे से देश की संपत्ति का नुकसान होता है और व्यापार चौपट हो जाता है। देश में अलगाव बढ़ता जाता है। धार्मिक कट्टरता की वजह से कई स्थानों पर व्यक्ति अकेला जाने से भी डरता है, जबकि सभी को समानता का अधिकार प्राप्त है।
-मोहन लाल सिन्धी, बांसवाड़ा