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आपकी बात: ईवटीजिंग पर अंकुश के लिए किस तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है?

पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 24, 2026

सामाजिक जागरूकता और व्यक्तिगत साहस

ईवटीजिंग पर रोक लगाने के लिए समाज, कानून और व्यक्तिगत स्तर पर ठोस प्रयास जरूरी हैं। परिवारों में लड़कों को बचपन से ही महिलाओं के सम्मान और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। समाज के लोगों को भी ऐसी घटनाओं पर चुप रहने के बजाय पीड़ित की मदद के लिए आगे आना चाहिए। छेड़छाड़ को सहन करने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है, इसलिए पीड़ित को तुरंत विरोध कर सहायता लेनी चाहिए। महिलाओं के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी व रोशनी की बेहतर व्यवस्था भी जरूरी है। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत

सख्त कार्रवाई और जनसहभागिता की जरूरत

ईवटीजिंग, यानी छेड़छाड़, पर नियंत्रण के लिए त्वरित और सख्त कार्रवाई आवश्यक है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि अपराधियों में भय का माहौल बने। महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे वे जरूरत पड़ने पर खुद की रक्षा कर सकें। इसके साथ ही समाज की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि ऐसी घटनाएं हों, तो दोषियों का सामाजिक बहिष्कार जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिससे इस प्रवृत्ति पर रोक लगे। - निर्मला वशिष्ठ, राजगढ़ (अलवर)

सोच में बदलाव और मजबूत सुरक्षा तंत्र

ईवटीजिंग केवल छेड़छाड़ नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसे रोकने के लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। परिवार और शिक्षण संस्थानों में बच्चों को नैतिकता और सम्मान का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी, महिला हेल्पलाइन और पुलिस गश्त को मजबूत किया जाए। साथ ही, दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो। महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना भी इस दिशा में अहम कदम है। - डॉ. दीपिका झंवर, जयपुर

पुलिस निगरानी और त्वरित कार्रवाई

ईवटीजिंग में घूरना, फब्तियां कसना या अनुचित स्पर्श जैसी घटनाएं शामिल हैं, जिनसे कई लड़कियां डर या सामाजिक दबाव के कारण चुप रहती हैं। इससे उनकी पढ़ाई या नौकरी भी प्रभावित होती है। इस समस्या से निपटने के लिए हर जिले में पुलिस की विशेष टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए, जो स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों के आसपास निगरानी रखे। समय-समय पर फील्ड मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई से महिलाओं में विश्वास और अपराधियों में डर पैदा किया जा सकता है। - दिनेश मेघवाल, उदयपुर

कानून का कड़ाई से पालन आवश्यक

ईवटीजिंग को रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन हो। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। स्कूलों में नैतिक शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि बच्चों में सही सोच विकसित हो। साथ ही, लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित किए बिना इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। - अमृतलाल मारू, इंदौर

आत्मरक्षा, संस्कार और हेल्पलाइन जागरूकता

ईवटीजिंग रोकने के लिए बच्चों में शुरू से ही अच्छे संस्कार देना जरूरी है, खासकर लड़कों को महिलाओं के प्रति सम्मान सिखाना चाहिए। लड़कियों को यह भरोसा दिया जाए कि वे ऐसी घटनाओं पर चुप न रहें और तुरंत परिवार या पुलिस को सूचित करें। स्कूलों में जूडो-कराटे का प्रशिक्षण अनिवार्य हो। सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों के आसपास नियमित पुलिस गश्त हो और सीसीटीवी लगाए जाएं। हेल्पलाइन नंबर 1090 और 112 का व्यापक प्रचार भी जरूरी है, ताकि समय पर सहायता मिल सके। - लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़

नैतिक शिक्षा और साझा जिम्मेदारी

ईवटीजिंग की समस्या से निपटने के लिए केवल सजा ही नहीं, बल्कि नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। बच्चों, खासकर लड़कों को बचपन से ही महिलाओं के सम्मान और समानता का महत्व समझाया जाए। स्कूल और कॉलेजों में भी इस विषय पर जागरूकता बढ़ाई जाए। किशोरावस्था में लड़कों और लड़कियों दोनों को सामाजिक जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए। जब शिक्षा में समानता है, तो व्यवहार और मूल्यों में भी समानता होनी चाहिए। - विभा गुप्ता, बैंगलुरु