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आपकी बात: सार्वजनिक शौचालयों की नियमित देखरेख के लिए क्या कदम उठाए जाएं?

पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 17, 2026

नियमित निगरानी और नागरिक सहभागिता

सार्वजनिक शौचालय किसी भी शहर की स्वच्छता और सभ्यता का प्रतीक होते हैं। नगर निकायों को नियमित सफाई और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। पानी, साबुन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता अनिवार्य हो। सीसीटीवी या डिजिटल मॉनिटरिंग से लापरवाही और तोड़फोड़ पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही, नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से बेहतर रखरखाव संभव है, बशर्ते प्रशासन और जनता मिलकर प्रयास करें। - डॉ. दीपिका झंवर

सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति और शुल्क व्यवस्था

सार्वजनिक शौचालयों की नियमित देखरेख के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है। इससे साफ-सफाई की निरंतरता बनी रहेगी और उपयोगकर्ताओं को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। साथ ही, न्यूनतम उपयोग शुल्क निर्धारित करना भी उपयोगी हो सकता है, जिससे रखरखाव के लिए आवश्यक धन जुटाया जा सके। यह व्यवस्था शौचालयों को बेहतर स्थिति में बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी। - सुरेंद्र बिंदल, जयपुर

अटेंडर और आधारभूत सुविधाओं की अनिवार्यता

सार्वजनिक शौचालयों के प्रभावी संचालन के लिए स्थायी अटेंडर की नियुक्ति जरूरी है। पानी की नियमित आपूर्ति और स्वच्छता का ध्यान न रखने से बीमारियों का खतरा बढ़ता है। अक्सर देखा गया है कि निर्माण के बाद कई शौचालय उपयोग में नहीं आते और बंद पड़े रहते हैं, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है। इसलिए निर्माण के साथ ही देखरेख की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है, ताकि ये सुविधाएं वास्तव में जनता के काम आ सकें। - ललित महालकरी, इंदौर

'एक शौचालय-एक संरक्षक' पहल होनी चाहिए

सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख के लिए 'एक शौचालय-एक संरक्षक' जैसी पहल कारगर हो सकती है। इसके तहत आसपास के बड़े व्यापारिक संस्थानों को शौचालयों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह कार्य वे कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत आसानी से कर सकते हैं। इससे नगर निकायों का बोझ कम होगा और शौचालयों की स्वच्छता भी सुनिश्चित होगी। सामाजिक सहयोग से यह व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकती है। - डॉ. आरती रायजादा, जोधपुर

तकनीक और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता

सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई के लिए स्थानीय प्रशासन को तकनीक का उपयोग बढ़ाना चाहिए। सेंसर आधारित उपकरण, नियमित निरीक्षण और हवादार ढांचे से स्वच्छता बनाए रखी जा सकती है। कीटनाशकों का उपयोग भी आवश्यक है ताकि संक्रमण का खतरा कम हो। यदि इन उपायों को व्यवस्थित रूप से लागू किया जाए, तो शौचालयों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान

सार्वजनिक शौचालयों में अक्सर पानी की बर्बादी, जाम टॉयलेट, टूटे दरवाजे और पर्याप्त रोशनी की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। दीवारों पर गंदगी और अनुचित लेखन भी आम है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को एनजीओ और सामाजिक संगठनों के सहयोग से नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए। सुरक्षित और स्वच्छ संचालन के लिए जनसहभागिता भी उतनी ही जरूरी है। - डॉ प्रेमराज मीना, करौली

सामूहिक जिम्मेदारी और स्थानीय भागीदारी

सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। ग्राम पंचायत, नगर निकाय और स्थानीय स्तर पर नियुक्त कर्मचारियों के साथ-साथ जागरूक नागरिकों की समितियां बनाकर सामूहिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इस साझेदारी से नियमित निगरानी और साफ-सफाई सुनिश्चित होगी, जिससे शौचालयों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। - आनन्द सिंह राजावत, ब्यावर

नियमित निरीक्षण और जल व्यवस्था पर जोर

शहरों में शौचालय तो बनाए गए हैं, लेकिन उनकी देखभाल में कमी के कारण गंदगी बढ़ जाती है। इसके समाधान के लिए पर्याप्त सफाई कर्मचारी और पानी की व्यवस्था जरूरी है। सफाई निरीक्षकों को दिन में कम से कम दो बार निरीक्षण करना चाहिए। नियमित धुलाई और निगरानी से शौचालयों की स्वच्छता बनी रह सकती है और उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधा मिल सकती है। - हरिप्रसाद चौरसिया, देवास