
डॉ. प्रभात ओझा, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर चाहे जितना असर पड़ा हो, हमारे यहां उसे कहीं अधिक डरावने ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। मकसद समझने में कोई भूल नहीं होनी चाहिए कि कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो चुके हैं। मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू गैस की खपत 17 फीसद तक गिर गई है। कमोबेश ऐसे घरेलू उपभोक्ता जो रजिस्टर्ड हैं, उन्हें बहुत दिक्कत नहीं है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में इंतजार लंबा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। समस्या वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं की है, जिन्होंने कई तरह के टैक्स और अन्य देनदारियों से बचने के लिए गैस की अपनी खपत कम दिखाई है। कम गैस खपत से वे अपना व्यवसाय भी कम दिखाते हैं। ऐसे उपयोगकर्ताओं को नियमों के मुताबिक, उतनी ही गैस मिलेगी जिसके लिए वे अधिकृत हैं। बाकी के लिए चोर-बाजार पर निर्भरता बढ़ी है।
बिना रजिस्ट्रेशन घरों में एलपीजी उपयोगकर्ताओं के भी यही हाल हैं। बिचौलिए इसका फायदा उठा रहे हैं। हाल में केंद्र सरकार की सुरक्षा मामलों की समिति ने हालात संभालने के उपायों पर विचार किया है। कमेटी की चिंता गैस के साथ तेल और फसलों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति भी बनाए रखने की थी। इस समिति के उपायों के परिणाम जल्द दिखने लगेंगे। इनके तहत उपभोक्ताओं में समान वितरण के लिए छोटे सिलेंडर अथवा कम गैस वाले सिलेंडर की आपूर्ति सिर्फ एक उपाय है। बाकी प्रशासनिक हैं और निश्चित ही इन उपायों के तहत कालाबाजियों के प्रति सख्ती का रास्ता ही उचित होगा।
सामरिक युद्ध की जो भी स्थिति बने, पर पश्चिम एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया एक आर्थिक युद्ध की ओर धकेली जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण ईरान के अपने करीब से गुजरने वाले हार्मुज स्ट्रेट को बंद कर देना है। होर्मुज स्ट्रेट वह अकेला जलडमरू है, जो फारस की खाड़ी को ओमान खाड़ी और दक्षिण पूर्व वाले अरब सागर को जोड़ता है। इससे दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी विदेश मंत्री ने अलग तरह का बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि होर्मुज बंद नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची जोड़ते हैं कि जहाज जरूर वहां से गुजरने से बच रहे हैं। ऐसा इसलिए कि इन जहाजों की बीमाकर्ता कंपनियां अपने दायित्वों से भाग रही है। यह कंपनियां भी इसे 'वार ऑफ च्वाइस, मानती हैं।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच मूल बात ईरान के तरीके पर है, जिससे तेल और गैस का संकट और अधिक बढ़ सकता है। ईरान ने अब इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों से 10 प्रतिशत तक की वसूली की योजना बनाई है। एक ईरानी जानकार के मुताबिक पहले कई तरह के प्रतिबंध और अब शहरों पर बमबारी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा। इस नई वसूली से ईरान को 73 अरब डॉलर प्रति वर्ष की कमाई होगी।
Published on:
25 Mar 2026 01:35 pm
