
आपकी बात, विवाह समारोह में फिजूलखर्ची क्यों बढ़ती जा रही है?
समाज रोके शादी में फिजूलखर्ची
हमारे समाज में विद्यमान बहुत सारी बुराइयों में से एक है शादी में बेतहाशा खर्च। लोग अपनी झूठी शान को बनाए रखने के लिए भले ही ऋण के जाल में फंस जाएं, मगर शादियों में पानी की तरह पैसा बहाएंगे जरूर। महंगे कपड़ों, महंगी गाड़ियों, मैरिज गार्डन, डीजे पार्टियों और शराब के साथ आलीशान शादी का दिखावा करते हैं। बेहतर तो यह है कि समाज सादगी के साथ सामान्य परंपराओं से विवाह समारोह कराने की ओर कदम बढ़ाए।
—रिदम जोशी, बेगूं, चित्तौड़गढ़
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संस्कार पर नहीं ध्यान
शादी विवाह, जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ और मृत्यु भोज पर आज भी भारत में अंधाधुंध दिखावा किया जाता है। शादियों में खाने में दर्जनों आइटम के साथ भव्य पंडाल होता है। अनाप-शनाप दहेज दिया जा रहा है। यही नहीं महंगे पटाखों की आतिशबाजी से स्वयं के साथ दूसरों को भी प्रदूषण और परेशानी देना आम है। दिखावे में लोग दूसरों की निजता भूल जाते हैं। आश्चर्य होता है यह देख कर कि कुछ साल भी नहीं बीतते और अचानक ऐसे कपल्स की तलाक की खबरें सुर्खियां बटोरने लगती हैं। दिखावे और खर्चे की बजाय संस्कारों पर ध्यान दिया जाए तो बेहतर होगा।
—एकता शर्मा, जयपुर
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कड़े कानून की जरूरत
विवाह समारोहों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए सरकार को कड़े कानून बनाने चाहिए और फिजूलखर्ची रोकने के लिए जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए। उपहार पर भी अनावश्यक पैसों की बर्बादी की जाती है, जो उचित नहीं है। खाने की बर्बादी रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।;
— आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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हो जाते हैं कर्जदार
हमारे देश में कुछ लोग विवाह समाराहों में इतना ज्यादा खर्चा कर देते हैं कि बाद में उनके घर का सारा बजट ही बिगड़ जाता है। कई तो कर्जदार हो जाते हैं। अमीर लोगों पर तो इसका फर्क नहीं पड़ता है। एक साधारण सी कमाई करने वाला और गरीब अगर विवाह समारोहों में लाखों रुपए खर्च करेगा तो मुश्किल में फंसेगा ही।
—राजेश कुमार चौहान, जालंधर
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झूठी शान का प्रदर्शन
आजकल शादियों में फिजूलखर्ची बढ़ती चली जा रही है। शादी में खर्च किसी भी तरफ से हो, गलत है। अमीर लोगों को ऐसे बेलगाम खर्च से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों पर इसकी ऐसी मार पड़ती है कि कई बार वह समूची जिंदगी नहीं उठ पाता। लोग ऐसा आमतौर पर इसलिए करते हैं कि वे अपनी झूठी शान का समाज में प्रदर्शन कर सकें। क्या ऐसे कार्यक्रम सादगी से होने चाहिए।
—अजिता शर्मा, उदयपुर
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आधुनिकता के नाम पर खर्च की होड़
वैश्वीकरण, तड़क—भड़क, देखादेखी और आधुनिक जीवनशैली ने विवाह समारोह में जनता को भव्य आयोजनों और शाही ख़र्चों की ओर प्रवृत्त कर दिया है। आधुनिकता के नाम पर विवाह पर खूब खर्च करने की होड़ चल रही है।
— मदनलाल लंबोरिया, भिरानी
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दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति
एक तरफ महंगाई चरम पर है, वहीं दूसरी ओर शादियों में खूब बढ़चढ़कर खर्च किया जा रहा है। खाने इतनी तरह के खिलाए जा रहा हैं कि समझ नहीं आए कि क्या खाएं। दिखावे और दूसरों से आगे निकलने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
— साजिद अली, इंदौर
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अघोषित प्रतिस्पर्धा
झूठी शान और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझने के कारण आपस में अघोषित प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही। इसी कारण विवाह समारोह का व्यय बढ़ता जा रहा।
- प्रहलाद यादव, महू, मप्र
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उचित नहीं है दिखावा
विवाह शादियों में आवश्यकता से अधिक खर्च दिखावे की वजह से किया जाता है, जिसे किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसी फिजूलखर्ची को रोककर अन्य परोपकार के कार्य करके पैसे का सदुपयोग किया जा सकता है।
—कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरू
Published on:
22 Feb 2023 05:20 pm
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