
क्यों आवश्यक मानी जाती है दृढ़ता
प्रो. हिमांशु राय निदेशक, आइआइएम इंदौर
कल्पना करें कि एक पर्वतारोही है। पर्वत पर भरपूर जुनून से पूर्ण चढ़ाई के समय, वह तेज हवाओं और अप्रत्याशित मौसम का सामना करता है। कभी बाधाओं से निपटने का प्रयास करता है तो कभी चोटिल हो जाता है। किन्तु फिर भी वह लगातार शिखर की ओर बढ़ता रहता है - अपने लक्ष्य की ओर। लीडरों को भी अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण के लिए अटूट प्रतिबद्धता के साथ अज्ञात समस्याओं को समझने की आवश्यकता होती है। यह किसी लड़ाई के समान ही है - और इस कठिन लड़ाई में दृढ़ता ही सार बन जाती है।चढ़ाई जितनी कठिन होगी, दृश्य उतना ही बेहतर होगा। इसलिए, दृढ़ता एक पर्वतारोही के लिए एक मूलभूत गुण बन जाता है। यह भी सत्य है कि हमें लगातार चलने पर थकान होती है। रुकना भी पड़ सकता है। यात्रा भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है जितनी मंजिल। इन चोटियों पर चढऩे के लिए, नेतृत्व की चुनौतियों से निपटने की तरह, धैर्य, विनम्रता और सहानुभूति के मिश्रण की आवश्यकता होती है।
मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में दृढ़ता के बारे में मनोवैज्ञानिक एंजेला डकवर्थ ने चर्चा की है। उनके मौलिक शोध ने दृढ़ता को बोलचाल की भाषा में मापने योग्य विशेषता से परे सफलता और उपलब्धि को समझने में मददगार बताया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दृढ़ता प्रतिभा से बढ़कर मानी जाती है। एक होती है प्रयास की दृढ़ता, जिसमें लंबे समय तक किसी लक्ष्य के प्रति ध्यान और ऊर्जा बनाए रखने की क्षमता शामिल होती है, खासकर चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने की। दूसरा है रुचि की निरंतरता, जिसमें दीर्घकालिक लक्ष्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता बनाए रखना और नवीनता या अल्पकालिक विकर्षणों के लालच का विरोध करना शामिल है। अर्थात, दृढ़ता मूलभूत गुण है जो तूफानों का सामना करने और स्थायी सफलता प्राप्त करने के लिए जरूरी है। व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे, इसका प्रभाव संगठनात्मक परिदृश्य में प्रतिध्वनित होता है। दृढ़ता से पूर्ण लीडर टीम की गतिशीलता को भी आकार देते हैं, जिससे संगठन की समग्र सफलता में मदद मिलती है।
Published on:
05 Feb 2024 08:06 pm
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
