पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
संयम और सहनशीलता की कमी
सामाजिक बदलाव और तकनीकी विकास का मानव जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ा है। इस पीढ़ी के किशोरों मे संवाद, संयम और सहनशीलता, धैर्य, क्षमा का अभाव है। किशोरों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति के पीछे अभिभावक भी हैं, क्योंकि वे बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। हिंसक वीडियो गेम खेलने से भी मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से किशोरों में हिंसक प्रवृति बढ़ती है। किशोरों में आत्म-नियंत्रण की कमी होती है। वे अपने संवेग के आधार पर फैसले ले लेते हैं।
-अनिल कराणा, खेतड़ी, झुंझुनूं
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समझ की कमी
किशोरों में अपराध प्रवृत्ति बढऩे का मुख्य कारण समझ का अभाव होना ही है, क्योंकि यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें जोश तो होता है पर होश नहीं होता है। कुछ संस्कारों का अभाव एवं अभिभावकों द्वारा बच्चों की तरफ ध्यान न देना भी है। इस अवस्था में बच्चे में इतनी सोच विकसित नहीं होती है, जिससे उसे पता चल सके कि अमुक कृत्य का परिणाम क्या होगा।
-कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरू
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बच्चों पर नियंत्रण नहीं
आज चारों तरफ एक ऐसे से वातावरण का सृजन हो गया है जिससे अधिकांश परिवार बच्चों पर नियंत्रण रखने में असफल सिद्ध हो रहे हैं। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर होने के कारण नैतिक मूल्य बिखरने लगे हैं। इसके साथ ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धा ने बालकों में विचलन पैदा कर दिया है।
-हनुमान सिंगवाडिया, झिलाय
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अति महत्त्वाकांक्षा का असर
किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका मुख्य कारण अति महत्त्वाकांक्षा और संस्कारों का अभाव है। संयुक्त परिवारों के विघटन के कारण भी किशोर अपराध में लिप्त होते जा रहे हैं।
-आशुतोष शर्मा, जयपुर
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संस्कारों का अभाव
किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति बढऩे का सबसे बड़ा कारण संस्कारों का अभाव है। स्कूल और घर पर बच्चों में संस्कार डालने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
-बी.बी.एल. माथुर, श्याम नगर, जयपुर
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इंटरनेट का असर
किशोर अपराध की दर दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। साथ ही इसकी प्रकृति भी जटिल होती जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है की अधिकांश परिवार बच्चों पर नियंत्रण रखने में विफल सिद्ध हो रहे हैं। अनैतिकता, मद्यपान, धूम्रपान से भरे चलचित्र और इंटरनेट की उपलब्धता का बच्चों के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। वे अवसाद के शिकार होकर अपराधों में लिप्त हो रहे हैं।
-पीहू साहू, महासमुंद, छत्तीसगढ़
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मोबाइल पर ऐसी सामग्री परोसी जाती है, जिसकी वजह से वयस्क दिमाग भी विचलित हो जाता है। किशोरों को इस तरह की अनैतिक जानकारी अपराध के दलदल में फंसाने के लिए पर्याप्त है। एक किशोर अन्य साथियों को अपने कुकृत्य में शामिल कर लेता है और अपराध बढ़ते रहते हैं।
-माधव सिंह भाम्मू, श्रीमाधोपुर, सीकर
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बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय
किशोरों में अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। किसी भी क्रिया के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है। आज जिस प्रकार से सोशल मीडिया और फिल्मी दुनिया में खलनायकों को नायक बनाकर महिमामंडित किया जा रहा है, वह आज के किशोरों और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। किशोर मन भी डॉक्टर, इंजीनियर बनने की बजाय गैंगस्टर बनने के बारे में सोचने लगता है। सोशल मीडिया और वीडियो गेम में असीमित मारधाड़ दिखाई जाती है। इस तरह बच्चों के कोमल मन को क्रूर और हिंसक बना कर उन्हें वास्तविक अपराध की दुनिया में धकेला जा रहा है। कुछ घरों में तो स्वयं बड़े भी सोशल मीडिया के जाल में फंसे हुए हैं। उन्हें नहीं पता बच्चे आदर्श भाषणों और दर्शनशास्त्र से नहीं बल्कि ऑब्जर्वेशन से सीखते हैं। हम जैसा बोएंगे वैसा ही तो काटेंगे। बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय।
-एकता शर्मा, जयपुर
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दिखावा करने की प्रवृत्ति है कारण
किशोरों में अपराधों की मुख्य वजह है सहनशीलता की कमी, कम समय और कम मेहनत में अमीर बनने की चाहत रखना। अपनी क्षमता से ज्यादा दिखावा करने से भी अपराधों को बढ़ावा मिलता है।
-अनोप भाम्बु, जोधपुर